यरुशलम, 27 अक्टूबर 2026: Israel में मंगलवार को हो रहे Election प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं। साल 2023 में हमास के हमले, गाजा में सैन्य कार्रवाई, ईरान के साथ युद्ध और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजरायल के बढ़ते अलगाव के बीच मतदाता नेतन्याहू के नेतृत्व का आकलन कर रहे हैं।
नेतन्याहू इजरायल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेता हैं और अब तक कुल 19 साल सत्ता में रह चुके हैं। कई विवादों और सुरक्षा चुनौतियों के बावजूद उनकी राजनीतिक पकड़ बनी हुई है। देश की राष्ट्रवादी राजनीति में दक्षिणपंथी दलों का प्रभाव और इजरायल की जटिल गठबंधन व्यवस्था उनके लिए एक बार फिर सरकार बनाने की संभावना बनाए हुए है।
नेतन्याहू और गैडी आइजेनकोट के बीच कड़ा मुकाबला
Election से पहले आए ओपिनियन पोल में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और उसके दक्षिणपंथी सहयोगियों का मुकाबला गैडी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन से बताया गया है। आइजेनकोट इजरायली सेना के पूर्व प्रमुख रह चुके हैं और सुरक्षा मामलों पर सख्त रुख रखने के लिए जाने जाते हैं। उन्हें दक्षिणपंथी और मध्यमार्गी मतदाताओं का समर्थन हासिल है।
मंगलवार सुबह स्थानीय समयानुसार 7 बजे मतदान केंद्र खुलने के बाद वोटिंग शुरू हुई। मतदान रात 10 बजे बंद होगा। इजरायल की केंद्रीय Election समिति के मुताबिक, देश में कुल 73 लाख मतदाता मतदान के पात्र हैं। इनमें करीब 3.30 लाख मतदाता पहली बार अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं।
नेतन्याहू ने अपने Election प्रचार में युद्ध के दौरान अपने नेतृत्व और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ संबंधों को प्रमुखता दी है। ट्रंप ने उनका समर्थन किया है और ईरान के खिलाफ युद्ध में इजरायल के साथ मिलकर कार्रवाई भी की है।
नेतन्याहू ने रविवार को कहा था कि ट्रंप ईरान से पैदा होने वाले खतरे को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए दोबारा कार्रवाई करने को तैयार हैं, लेकिन इसके लिए नेतन्याहू का सत्ता में बने रहना जरूरी है।
दूसरी ओर, आइजेनकोट ने नेतन्याहू पर डर फैलाने, झूठ और धमकियों के सहारे Election प्रचार करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उन्हें भरोसा है कि ट्रंप जनता द्वारा चुने गए किसी भी नेता के साथ पूरा सहयोग करेंगे।
सरकार बनाने के लिए दक्षिणपंथी सहयोगियों पर निर्भरता
नेतन्याहू को सरकार बनाने के लिए एक बार फिर दक्षिणपंथी नेताओं इतामार बेन-ग्विर और बेजलेल स्मोट्रिच का समर्थन लेना पड़ सकता है। दोनों नेताओं पर कुछ पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगाए हैं। इन देशों का आरोप है कि वे फिलिस्तीनियों के खिलाफ हिंसा भड़काने में भूमिका निभाते हैं।
हालांकि, बेन-ग्विर की पार्टी ज्यूइश पावर को ओपिनियन पोल में समर्थन मिलता दिखाई दिया है।
नेतन्याहू और आइजेनकोट, दोनों के सामने सरकार बनाने की चुनौती है। यदि कोई भी नेता संसद की 120 सीटों में बहुमत जुटाकर गठबंधन बनाने में नाकाम रहता है, तो नेतन्याहू अगले साल दोबारा Election होने तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रह सकते हैं।
7 अक्टूबर के हमले का जवाब मांग रहे मतदाता
इजरायल का यह Election 1948 में देश की स्थापना के बाद के सबसे उथल-पुथल भरे दौर में हो रहा है। इसके केंद्र में 7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में हुए हमले, उसके बाद गाजा में इजरायली सैन्य अभियान और नेतन्याहू सरकार की नीतियों को लेकर देश के भीतर गहराता विभाजन है।
नेतन्याहू के विरोधियों के लिए इस Election का सबसे अहम मुद्दा 7 अक्टूबर के हमले से पहले और उसके दौरान हुई सुरक्षा संबंधी चूकों की जवाबदेही है। यह हमला इजरायल के इतिहास का सबसे घातक दिन साबित हुआ था।
शिक्षा मंत्रालय में काम करने वाली और आइजेनकोट की समर्थक माली हज्जाज ने कहा कि सबसे जरूरी काम एक राष्ट्रीय जांच आयोग का गठन करना है। उनके मुताबिक, इसी प्रक्रिया से देश को इस त्रासदी से उबरने में मदद मिल सकती है।
वहीं, लिसा टॉर्टर ने उम्मीद जताई कि नेतन्याहू सत्ता से हटेंगे और नई सरकार बनेगी। उन्होंने कहा कि इससे यहूदी समुदाय, इजरायल और दुनिया भर में देश की छवि को हुए नुकसान की भरपाई करने का मौका मिल सकता है। बिबी नेतन्याहू का लोकप्रिय उपनाम है।
हालांकि, सभी मतदाता नेतन्याहू को 7 अक्टूबर की घटनाओं के लिए जिम्मेदार नहीं मानते। 18 वर्षीय लिकुड समर्थक नोफ गाबे ने उन्हें इजरायल के लिए सही नेता बताया। गाबे के अनुसार, नेतन्याहू ने युद्ध को संभव तरीके से सबसे बेहतर ढंग से संभाला।

गाजा से ईरान तक, नेतन्याहू के कार्यकाल में कई सैन्य अभियान
7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व वाले हमलावरों ने इजरायल में 1,200 लोगों की हत्या कर दी थी और 251 लोगों को बंधक बना लिया था। इसके बाद इजरायल ने गाजा में सैन्य अभियान शुरू किया, जिसमें क्षेत्र का बड़ा हिस्सा तबाह हो गया।
गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, इजरायली हमलों में अब तक 74,000 लोगों की मौत हुई है।
इस दौरान इजरायल ने लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्लाह को भी भारी नुकसान पहुंचाया। इसके अलावा, इजरायल और ईरान के बीच भी हमले हुए। वर्ष 2025 में ईरान के परमाणु ठिकानों के खिलाफ 12 दिनों तक हवाई अभियान चलाया गया। इसके बाद 2026 में अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के खिलाफ युद्ध किया।
आइजेनकोट का कहना है कि इजरायल की अगली सरकार को ईरान को सैन्य परमाणु क्षमता हासिल करने से रोकना चाहिए। उनके मुताबिक, इसके लिए सैन्य कार्रवाई या अमेरिका के समर्थन से होने वाला कूटनीतिक समझौता, दोनों विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।
फिलिस्तीन मुद्दे पर आइजेनकोट का रुख क्या है?
इजरायल की लगभग सभी प्रमुख यहूदी-नेतृत्व वाली पार्टियों की तरह आइजेनकोट भी दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन नहीं करते। यही समाधान दशकों तक फिलिस्तीनियों के साथ शांति वार्ता का आधार रहा है।
हालांकि, उन्होंने कब्जे वाले वेस्ट बैंक में यहूदी बस्तियों के निवासियों द्वारा फिलिस्तीनियों के खिलाफ की जाने वाली हिंसा की आलोचना की है। वर्ष 2023 के बाद से ऐसी घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है, जिससे इजरायल के पश्चिमी देशों के साथ संबंधों पर भी दबाव पड़ा है।
आइजेनकोट नेतन्याहू के दक्षिणपंथी गठबंधन सहयोगियों बेन-ग्विर और स्मोट्रिच का भी विरोध करते हैं।
इस बीच, कभी लिकुड पार्टी का मजबूत गढ़ माने जाने वाले कुछ इलाकों में नेतन्याहू से नाराज मतदाता दूसरे लोगों को उनके खिलाफ वोट देने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे नेतन्याहू इन मामलों में खुद को निर्दोष बताते हैं। उनके खिलाफ लंबे समय से आपराधिक मुकदमा चल रहा है।
अरब मतदाताओं के वोट क्यों हो सकते हैं अहम?
इजरायल के अरब अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाताओं की अधिक भागीदारी Election के नतीजों और सरकार बनाने के समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। ये नागरिकता के लिहाज से इजरायली हैं, जबकि उनकी विरासत फिलिस्तीनी है।
अरब पार्टियों के साथ सरकार बनाने से आइजेनकोट पहले ही इनकार कर चुके हैं। उन्होंने इसके पीछे साझा मूल्यों की कमी का हवाला दिया है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि अरब पार्टियां उनकी अगुवाई वाली अल्पमत सरकार को बाहर से समर्थन दे सकती हैं। इससे नेतन्याहू को सत्ता से हटाने का रास्ता खुल सकता है।
इजरायली राजनीतिक विश्लेषक और शालोम हार्टमैन इंस्टीट्यूट से जुड़े अमोत्स असा-एल ने कहा कि उन्हें दोनों पक्षों के बीच बहुत मामूली अंतर की उम्मीद है, न कि किसी एक पक्ष की बड़ी जीत की।
Election के बाद क्या होगा?
इजरायल के मतदाताओं के सामने इस बार सुरक्षा, युद्ध, सरकार की जवाबदेही, अंतरराष्ट्रीय संबंध और भविष्य की राजनीतिक दिशा जैसे अहम सवाल हैं। नेतन्याहू के लिए यह Election उनके लंबे राजनीतिक करियर और सत्ता में बने रहने की क्षमता की बड़ी परीक्षा है।
हालांकि, मतदान के बाद भी सरकार गठन का रास्ता आसान नहीं दिख रहा। इजरायल की गठबंधन आधारित राजनीति में अंतिम तस्वीर इस बात पर निर्भर करेगी कि कौन-सा पक्ष संसद में जरूरी समर्थन जुटा पाता है। यदि कोई भी पक्ष बहुमत हासिल नहीं कर पाता, तो देश को अगले साल फिर Election का सामना करना पड़ सकता है।
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