Siyaram Recycling Order: Siyaram Recycling Industries Limited ने दुबई की कंपनी Green Metals FZCO से ब्रास बिलेट्स (Brass Billets) की आपूर्ति के लिए ₹8.71 करोड़ से ज्यादा का ऑर्डर हासिल किया है। कंपनी ने 28 अक्टूबर 2026 को BSE को दी गई जानकारी में इस ऑर्डर की घोषणा की।
दुबई की कंपनी से मिला ₹8.71 करोड़ का ऑर्डर
कंपनी की ओर से जारी आधिकारिक सूचना के मुताबिक, Green Metals FZCO, दुबई, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने Siyaram Recycling Industries Limited को ब्रास बिलेट्स के लिए यह ऑर्डर दिया है। ऑर्डर की कुल कीमत ₹8,71,37,263.24 है, यानी करीब ₹8.71 करोड़।
Siyaram Recycling bags ₹8.71 crore international order!
The company has secured an order from Dubai-based Green Metals FZCO for Brass Billets, with execution scheduled within 30 days. The company disclosed the development to BSE on October 28, 2026.#SiyaramRecycling…
कंपनी ने यह जानकारी SEBI के Listing Obligations and Disclosure Requirements Regulations, 2015 के Regulation 30 के तहत BSE Limited को दी है। कंपनी का स्क्रिप कोड 544047 है, जबकि ISIN INE0QSK01017 है।
30 दिनों के भीतर पूरा करना होगा ऑर्डर
कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, यह एक अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर है और इसकी प्रकृति फिक्स्ड कॉस्ट (Fixed Cost) है। ऑर्डर को 30 दिनों के भीतर पूरा किया जाना है।
दस्तावेज में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ऑर्डर देने वाली कंपनी में Siyaram Recycling के प्रमोटर, प्रमोटर ग्रुप या ग्रुप कंपनियों की कोई हिस्सेदारी या रुचि नहीं है। साथ ही, यह सौदा संबंधित पक्षों के बीच होने वाला लेनदेन (Related Party Transaction) नहीं है।
कंपनी ने BSE को दी जानकारी
Siyaram Recycling Industries Limited के मैनेजिंग डायरेक्टर भावेश रामगोपाल माहेश्वरी ने 28 अक्टूबर 2026 को कंपनी की ओर से इस सूचना पर हस्ताक्षर किए। कंपनी ने SEBI के नियमों के तहत ऑर्डर से जुड़ी जरूरी जानकारी नियामकीय एक्सचेंज को उपलब्ध कराई है।
डिस्क्लेमर: यह खबर कंपनी द्वारा BSE को दी गई आधिकारिक सूचना पर आधारित है। इसमें किसी निवेश सलाह या शेयर खरीदने-बेचने की सिफारिश का उद्देश्य नहीं है।
कोर्ट ने साफ किया- अडानी समूह या सरकारी नीतियों की तथ्यात्मक आलोचना पर रोक नहीं, लेकिन बिना सबूत गंभीर आरोपों को फैलाने पर उठाए सवाल
कलकत्ता हाईकोर्ट ने अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड के खिलाफ कथित मानहानिकारक वीडियो को लेकर अंतरिम आदेश जारी किया है। कोर्ट ने टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म्स को “How Modi and Adani Stole India – The Friendship Files” नाम के वीडियो तक पहुंच रोकने का निर्देश दिया है। यह वीडियो भारतीय-अमेरिकी उद्यमी और YouTube क्रिएटर सबीर भाटिया ने पोस्ट किया था। कंपनी का आरोप है कि वीडियो में आतंकवाद के वित्तपोषण और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
जस्टिस आर्यक दत्त ने 26 अक्टूबर को अडानी एंटरप्राइजेज की ओर से दायर दीवानी मानहानि याचिका पर सुनवाई की। कंपनी ने आरोप लगाया कि वीडियो में झूठे और मानहानिकारक दावों के कारण उसकी प्रतिष्ठा और साख को नुकसान पहुंचा है। याचिका में हर्जाने की मांग के साथ विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से छह मिनट के वीडियो को हटाने की भी अपील की गई थी।
कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता, अडानी समूह या सरकारी नीतियों की रचनात्मक आलोचना और तथ्यों पर आधारित रिपोर्टिंग पर रोक नहीं है। हालांकि, ऑनलाइन सामग्री को बार-बार शेयर और दोबारा अपलोड किए जाने से प्रतिष्ठा को होने वाला नुकसान तेजी से बढ़ सकता है।
अदालत के मुताबिक, ऐसी स्थिति में केवल आर्थिक मुआवजा नुकसान की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता। कोर्ट ने कहा कि यदि अभी आदेश नहीं दिया गया, तो दूसरे पक्षों की सुनवाई होने से पहले ही वीडियो का प्रसार जारी रह सकता है और आदेश का उद्देश्य विफल हो सकता है।
अदालत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि उसका आदेश अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी समूह या सरकार की नीतियों को लेकर तथ्यों और सबूतों पर आधारित आलोचना, निष्पक्ष रिपोर्टिंग या टिप्पणी पर प्रतिबंध नहीं लगाता।
“How Modi and Adani Stole India” वीडियो विवाद में कलकत्ता हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद यह मामला चर्चा में है। अदालत ने वीडियो के प्रसार पर रोक लगाने का निर्देश दिया, लेकिन स्पष्ट किया कि तथ्यों पर आधारित आलोचना और रिपोर्टिंग पर प्रतिबंध नहीं है।
अडानी एंटरप्राइजेज ने क्यों दायर की मानहानि याचिका?
अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने हाईकोर्ट में सबीर भाटिया के खिलाफ दीवानी मानहानि याचिका दायर की है। भाटिया YouTube चैनल “Bcubed” और अपने X अकाउंट के जरिए वीडियो साझा करते हैं। याचिका में YouTube, X (पूर्व में ट्विटर), Instagram और वीडियो के प्रसार में कथित रूप से शामिल अज्ञात लोगों को भी पक्षकार बनाया गया है।
9 अक्टूबर को भाटिया ने “How Modi and Adani Stole India – The Friendship Files” शीर्षक से 36 मिनट का वीडियो YouTube पर अपलोड किया था। इसे “Shadow Citizens” नाम के चैनल के सहयोग से बनाया गया था। इसके बाद वीडियो को X पर भी साझा किया गया। दोनों प्लेटफॉर्म पर इसे तेजी से हजारों की संख्या में व्यूज मिले।
वीडियो के शीर्षक में आरोप लगाया गया कि कारोबारी समूह ने एक सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति के साथ मिलकर “भारत को लूटा”। इसके अलावा, वीडियो में कई गंभीर दावे किए गए। इनमें समूह को आतंकवाद के वित्तपोषण के लिए इस्तेमाल होने वाली नशीले पदार्थों की तस्करी से जोड़ने और एक किसान के खिलाफ पुलिस हिंसा तथा झूठे मुकदमे की साजिश रचने के आरोप भी शामिल थे।
सूचना प्रौद्योगिकी नियमों के तहत कंपनी की शिकायत के बाद भारत में मूल YouTube वीडियो तक पहुंच बंद कर दी गई थी। हालांकि, अडानी एंटरप्राइजेज की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अनिर्बान रे और अन्य वकीलों ने अदालत में दलील दी कि इसके बावजूद वीडियो की क्लिप, छोटे संस्करण और दोबारा अपलोड की गई प्रतियां YouTube, X और Instagram पर प्रसारित होती रहीं। याचिका के मुताबिक, भाटिया ने 22 अक्टूबर को भी X पर सामग्री दोबारा साझा की थी।
‘आपराधिक आरोपों के समर्थन में कोई सबूत नहीं’
अदालत ने माना कि जनहित से जुड़े मानहानि के मामलों में मुकदमे की सुनवाई पूरी होने से पहले रोक लगाने का फैसला बेहद सावधानी से लिया जाना चाहिए।
हालांकि, कोर्ट ने इस मामले को असाधारण श्रेणी में रखा। उसके अनुसार, वीडियो कोई सामान्य समाचार रिपोर्ट या किसी घटना की कार्यवाही का विवरण नहीं है, बल्कि इसे नाटकीय अंदाज में पेश किया गया है। शीर्षक में चोरी का सीधा आरोप लगाया गया है, जबकि वीडियो की कहानी और दृश्य आरोपों को तथ्य की तरह प्रस्तुत करते हैं।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अडानी समूह पर आतंकवाद के वित्तपोषण से जुड़ी नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल होने या इस मामले में जवाबदेही से बचाए जाने का आरोप, साथ ही किसान के खिलाफ पुलिस हिंसा और झूठे मुकदमे की साजिश का दावा, केवल राय नहीं बल्कि तथ्यात्मक आरोप हैं।
कोर्ट ने कहा कि उसके सामने ऐसा कोई दस्तावेज या सामग्री नहीं रखी गई, जिससे पता चले कि किसी प्राधिकरण ने इन आरोपों की पुष्टि की है।
अदालत ने यह भी कहा कि वीडियो में बार-बार “अडानी” और “अडानी समूह” का नाम लिया गया है तथा समूह के विशिष्ट कारोबारों का उल्लेख किया गया है। इससे आरोप सीधे याचिकाकर्ता कंपनी से जुड़ते हैं।
कोर्ट ने यह भी ध्यान दिलाया कि मूल वीडियो को सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के नियम 3(1)(d) के तहत भारत में पहले ही निष्क्रिय किया जा चुका था। इसके बाद भाटिया की ओर से वीडियो को दोबारा साझा करना प्रथम दृष्टया सद्भावना की कमी का संकेत देता है, ऐसा अदालत ने कहा।
अब इस मामले को आगे की सुनवाई के लिए जनवरी 2027 की मासिक सूची में नियमित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया है।
How Modi-Adani वीडियो मामले में अदालत ने कहा कि गंभीर आरोपों को तथ्य के रूप में पेश करने के लिए सबूत जरूरी हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका आदेश रचनात्मक आलोचना या प्रमाण-आधारित टिप्पणी को नहीं रोकता।
Q1. What is the “How Modi and Adani Stole India” video?
“How Modi and Adani Stole India – The Friendship Files” सबीर भाटिया द्वारा पोस्ट किया गया एक वीडियो है, जिसमें अडानी समूह और सरकारी पद पर बैठे व्यक्ति को लेकर आरोप लगाए गए हैं।
Q2. Why did the Calcutta High Court restrict the video?
कलकत्ता हाईकोर्ट ने अडानी एंटरप्राइजेज की मानहानि याचिका पर अंतरिम आदेश जारी किया। अदालत ने वीडियो में लगाए गए गंभीर आरोपों और उनके समर्थन में उपलब्ध सामग्री पर सवाल उठाए।
Q3. Who created the How Modi-Adani video?
यह वीडियो भारतीय-अमेरिकी उद्यमी और YouTube क्रिएटर सबीर भाटिया ने “Shadow Citizens” चैनल के सहयोग से पोस्ट किया था।
Q4. What is the title of the video at the centre of the How Modi-Adani case?
वीडियो का पूरा शीर्षक “How Modi and Adani Stole India – The Friendship Files” है। इसे लेकर अडानी एंटरप्राइजेज ने मानहानि का मामला दायर किया है।
Q5. When was the How Modi-Adani video uploaded?
याचिका के अनुसार, सबीर भाटिया ने यह वीडियो 9 अक्टूबर को YouTube पर अपलोड किया था और इसे X पर भी साझा किया था।