Russia में नौकरी का झांसा, डिटेंशन सेंटर और आखिरी ऑडियो मैसेज! बिलासपुर के युवक की तलाश में भटक रहा परिवार

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$1,200 महीने की नौकरी के लिए Russia गया था 21 साल का विनीत, अचानक गायब हुआ; बहन को मिली भाई की मौत की खबर

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में रहने वाली 17 साल की एक लड़की पिछले 21 दिनों से अपने 21 वर्षीय भाई की तलाश में सरकारी अधिकारियों के दरवाजे खटखटा रही है। वह सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर भी मदद मांग रही है। उसका कहना है कि भाई इसी महीने नौकरी करने Russia गया था, लेकिन 6 अक्टूबर से उसका कोई पता नहीं चल रहा है।

विनीत कुमार दुबे ने 10वीं कक्षा तक पढ़ाई की है। उसकी बहन आशी के मुताबिक, वह काफी समय से नौकरी की तलाश में था। इसी दौरान उसे Russia के एक रेस्टोरेंट में फूड स्टोरेज सुपरवाइजर की नौकरी का प्रस्ताव मिला। इसके लिए उसे हर महीने 1,200 डॉलर यानी करीब 1.14 लाख रुपये वेतन देने की बात कही गई थी।

आशी ने बताया कि नौकरी देने वाली कंपनी ने उसके भाई के टूरिस्ट वीजा और हवाई टिकट पर करीब 70,000 रुपये खर्च किए। हालांकि, विनीत को न तो कोई जॉब कॉन्ट्रैक्ट दिया गया और न ही यह बताया गया कि उसे Russia के किस शहर में काम करना होगा। जिस व्यक्ति से वह टेलीग्राम पर संपर्क में था, उसने भरोसा दिलाया था कि Russia पहुंचने के बाद उसका टूरिस्ट वीजा वर्क वीजा में बदल दिया जाएगा।

विनीत के परिवार में उसके पिता और 17 साल की बहन हैं। उसके पिता एक राइस मिल में सुपरवाइजर के रूप में काम करते हैं। परिवार के मुताबिक, 2019 में विनीत की मां ने आत्महत्या कर ली थी, जिसके बाद से परिवार मुश्किल हालात से गुजर रहा है।

आशी ने बताया कि विनीत चाहता था कि अच्छी कमाई करके वह अपने परिवार और अपनी गर्लफ्रेंड को गर्व महसूस करा सके। उसकी योजना Russia से लौटने के बाद अपनी गर्लफ्रेंड से शादी करने की भी थी।

विनीत को लगता था कि अंग्रेजी भाषा पर अच्छी पकड़ होने के कारण उसे यह नौकरी मिली है। इसलिए उसने ज्यादा पड़ताल किए बिना Russia जाने का फैसला कर लिया। छत्तीसगढ़ से बाहर पहले कभी नहीं गया विनीत 29 सितंबर को बिलासपुर के बिल्हा स्थित अपने घर से दिल्ली पहुंचा। वहां से उसने मॉस्को के लिए उड़ान भरी और 1 अक्टूबर को Russia पहुंच गया। इसके बाद वह दूसरी फ्लाइट से वोल्गोग्राड गया।

आशी के मुताबिक, वोल्गोग्राड पहुंचने के बाद विनीत को पांच दिनों तक एक अपार्टमेंट में अकेले रखा गया। उसे Russia का सिम कार्ड वाला मोबाइल फोन और खाने-पीने का सामान व गर्म कपड़े खरीदने के लिए 5,000 रूबल दिए गए।

इस दौरान वह अपनी बहन से नियमित रूप से वीडियो कॉल पर बात करता था। वह उसे अपने अपार्टमेंट और शहर की झलक भी दिखाता था। आशी का दावा है कि मॉस्को एयरपोर्ट पर एक व्यक्ति विनीत से मिला था और उसने यह सुनिश्चित किया कि वह भारतीय दूतावास से संपर्क न कर सके।

फिर 6 अक्टूबर को पहली बार उसके परिवार को कुछ गड़बड़ होने का एहसास हुआ।

आशी ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “6 अक्टूबर को शाम करीब 5 या 6 बजे भाई का फोन आया। वह डरा हुआ और परेशान लग रहा था। उसकी आवाज कांप रही थी। उसने बताया कि कंपनी ने उसके साथ धोखा किया है और अब उस पर डिलीवरी मैन के तौर पर काम करने का दबाव बनाया जा रहा है। मैंने उससे कहा कि मैं अपनी बचत से उसे पैसे भेज दूंगी और उसे किसी तरह घर लौट आना चाहिए।”

Russia Job Scam Case

उसने आगे बताया, “भैया ने कहा था कि अगले दिन वह कंपनी से उसे भारत वापस भेजने के लिए कहेगा। लेकिन उसके बाद हमारी कभी बात नहीं हुई।”

उसी रात करीब 10:30 बजे विनीत ने अपने पिता को आखिरी बार फोन किया। उसने बताया कि अगले दिन उसे कहीं “ले जाया जा रहा है”। उसने परिवार से कहा कि अगर उसका फोन बंद हो जाए तो वे चिंता न करें। 7 अक्टूबर से उसका मोबाइल फोन लगातार बंद है।

8 अक्टूबर को आशी ने Russia स्थित भारतीय दूतावास को ईमेल भेजा। इसके बाद उसने MADAD पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई। यह पोर्टल विदेश में रहने वाले भारतीयों को कांसुलर सेवाएं उपलब्ध कराने और उनकी शिकायतों के प्रबंधन के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

आशी के अनुसार, पोर्टल पर जवाब देने वाले एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि उसके भाई को एक प्रतिबंधित पदार्थ के साथ पकड़े जाने के बाद डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। उसने यह भी बताया कि सरकार की ओर से विनीत के लिए एक वकील और अनुवादक की व्यवस्था की गई है।

हालांकि, आशी को इस जानकारी पर भरोसा नहीं है। उसने सवाल उठाया, “अगर उसके पास कोई प्रतिबंधित पदार्थ था, तो वह अपनी यात्रा के दौरान तीन अलग-अलग एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच से कैसे निकल गया?”

9 अक्टूबर की आधी रात के आसपास आशी को एक और फोन आया। इस बार फोन करने वाला व्यक्ति भी भारतीय था।

आशी के मुताबिक, उस व्यक्ति ने बताया कि विनीत को डिटेंशन सेंटर में रखा गया है और उसे ट्रेनिंग देकर यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में भेजा जा सकता है। उसने विनीत की मदद के लिए वकील रखने के नाम पर 3.5 लाख रुपये भी मांगे।

13 अक्टूबर को विनीत ने डिटेंशन सेंटर से अपने अनुवादक के माध्यम से परिवार को आखिरी वॉइस मैसेज भेजा। इस संदेश में उसने अपने परिवार से माफी मांगी थी।

आशी के मुताबिक, विनीत ने संदेश में कहा, “मैं Russia काम करने आया था, लेकिन मुसीबत में फंस गया हूं। जेल और कोर्ट के बीच अटका हुआ हूं। ज्यादा मत सोचना और पापा को भी ज्यादा परेशान मत होने देना। उसे (अपनी गर्लफ्रेंड को) बता देना कि मैं उसकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। मुझे पता है कि मैं छह से सात साल तक वापस नहीं आ पाऊंगा। मैंने सोचा था कि सबके लिए पैसे कमाऊंगा और सभी को खुश रखूंगा, लेकिन अब लगता है कि ऐसा नहीं हो पाएगा।”

विनीत से कोई संपर्क नहीं हो पाने के कारण उसकी बहन ने बिलासपुर के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और प्रधानमंत्री समेत कई राजनीतिक नेताओं को पत्र लिखकर मदद मांगी।

मंगलवार को परिवार को एक और ऑडियो मैसेज मिला। इसमें दावा किया गया कि विनीत ने आत्महत्या कर ली है। हालांकि, परिवार को अब तक यह पता नहीं चल पाया है कि संदेश असली है या फर्जी।

आशी ने बताया कि Russia से फोन करने वाले एक व्यक्ति ने दावा किया कि वह भी उसी डिटेंशन सेंटर में विनीत के साथ था और विनीत ने अपनी जान दे दी है।

उसने कहा, “मेरे पिता रोने लगे। हमें नहीं पता कि किसकी बात पर भरोसा करें। सरकार को कम से कम हमें स्थिति के बारे में जानकारी देनी चाहिए।”

बिलासपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजनेश सिंह ने बताया कि पुलिस को विनीत की बहन की शिकायत मिल चुकी है। उन्होंने कहा, “हमने करीब एक सप्ताह पहले भारतीय दूतावास को पत्र लिखा था, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।”

बिलासपुर के कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि उन्होंने इस मामले पर एसएसपी से चर्चा की है। प्रशासन ने विदेश मंत्रालय से भी संपर्क किया है। उन्होंने मामले में सकारात्मक नतीजे की उम्मीद जताई।

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Siyaram Recycling को दुबई से मिला ₹8.71 करोड़ का बड़ा ऑर्डर, 30 दिनों में करना होगा पूरा

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Siyaram Recycling Order: Siyaram Recycling Industries Limited ने दुबई की कंपनी Green Metals FZCO से ब्रास बिलेट्स (Brass Billets) की आपूर्ति के लिए ₹8.71 करोड़ से ज्यादा का ऑर्डर हासिल किया है। कंपनी ने 28 अक्टूबर 2026 को BSE को दी गई जानकारी में इस ऑर्डर की घोषणा की।

दुबई की कंपनी से मिला ₹8.71 करोड़ का ऑर्डर

कंपनी की ओर से जारी आधिकारिक सूचना के मुताबिक, Green Metals FZCO, दुबई, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने Siyaram Recycling Industries Limited को ब्रास बिलेट्स के लिए यह ऑर्डर दिया है। ऑर्डर की कुल कीमत ₹8,71,37,263.24 है, यानी करीब ₹8.71 करोड़।

कंपनी ने यह जानकारी SEBI के Listing Obligations and Disclosure Requirements Regulations, 2015 के Regulation 30 के तहत BSE Limited को दी है। कंपनी का स्क्रिप कोड 544047 है, जबकि ISIN INE0QSK01017 है।

30 दिनों के भीतर पूरा करना होगा ऑर्डर

कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, यह एक अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर है और इसकी प्रकृति फिक्स्ड कॉस्ट (Fixed Cost) है। ऑर्डर को 30 दिनों के भीतर पूरा किया जाना है।

दस्तावेज में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ऑर्डर देने वाली कंपनी में Siyaram Recycling के प्रमोटर, प्रमोटर ग्रुप या ग्रुप कंपनियों की कोई हिस्सेदारी या रुचि नहीं है। साथ ही, यह सौदा संबंधित पक्षों के बीच होने वाला लेनदेन (Related Party Transaction) नहीं है।

Siyaram Recycling को दुबई से मिला ₹8.71 करोड़ का बड़ा ऑर्डर

कंपनी ने BSE को दी जानकारी

Siyaram Recycling Industries Limited के मैनेजिंग डायरेक्टर भावेश रामगोपाल माहेश्वरी ने 28 अक्टूबर 2026 को कंपनी की ओर से इस सूचना पर हस्ताक्षर किए। कंपनी ने SEBI के नियमों के तहत ऑर्डर से जुड़ी जरूरी जानकारी नियामकीय एक्सचेंज को उपलब्ध कराई है।

डिस्क्लेमर: यह खबर कंपनी द्वारा BSE को दी गई आधिकारिक सूचना पर आधारित है। इसमें किसी निवेश सलाह या शेयर खरीदने-बेचने की सिफारिश का उद्देश्य नहीं है।

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