डावोस/वॉशिंगटन :- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को दोहराया कि अमेरिका NATO के प्रति अपनी प्रतिबद्धता निभाएगा, लेकिन साथ ही उन्होंने यह सवाल भी सामने रखा कि जरूरत के वक्त क्या यह सैन्य गठबंधन अमेरिका के साथ मजबूती से खड़ा होगा। स्विट्ज़रलैंड के डावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (World Economic Forum) की सालाना बैठक में उन्होंने यह संदेश सीधे अपने सहयोगियों तक पहुंचाया।
क्या बोले ट्रंप
ट्रंप ने कहा, “हम NATO के साथ 100 फीसदी हैं, लेकिन मुझे नहीं पता कि वे हमारे लिए होंगे या नहीं।” उन्होंने गठबंधन को ऐसा बताया जिसमें अमेरिका ज़्यादा देता है और बदले में कम पाता है। उनका कहना था कि कई सालों से अमेरिकी टैक्सपेयर्स (American taxpayers) यूरोप की सुरक्षा का बड़ा हिस्सा उठा रहे हैं।
हमने क्या पाया?
उन्होंने यह भी जोड़ा कि NATO की मदद से अमेरिका को बहुत कम फायदा हुआ है। “हम उनके बिल भर रहे थे, आखिर किस लिए?” ट्रंप ने सवाल किया।
सशर्त सुरक्षा की बात
हालांकि ट्रंप ने यह साफ नहीं किया कि वह NATO देशों से कौन से ठोस कदमों की उम्मीद कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि उनका रुख गठबंधन को कमजोर करने के लिए नहीं है। उनके मुताबिक, अगर सदस्य देश ज़्यादा जिम्मेदारी और खर्च साझा करें, तो NATO और मजबूत बन सकता है।
धमकी नहीं, ‘मजबूती’ का दावा
कड़े शब्दों के बावजूद ट्रंप ने कहा कि उनका रुख गठबंधन के लिए खतरा नहीं है। उनके अनुसार, यदि सदस्य देश ज्यादा जिम्मेदारी और खर्च साझा करें तो NATO और मजबूत होगा, कमजोर नहीं।
यूरोप में बढ़ती चिंता
यह बयान ऐसे समय में आया है जब कई यूरोपीय देश ट्रंप के दूसरे कार्यकाल को लेकर अमेरिका की सुरक्षा गारंटी के भविष्य पर चिंता जता रहे हैं। अमेरिका लगातार NATO देशों से रक्षा बजट बढ़ाने और अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठाने पर जोर दे रहा है।
आगे क्या?
ट्रंप ने इस मौके पर अमेरिकी सैनिकों की तैनाती या किसी बड़े बदलाव को लेकर कोई नई घोषणा नहीं की। हालांकि, उनके बयान से यह साफ झलकता है कि वह गठबंधनों को बराबरी और “न्यायसंगत हिस्सेदारी” के नजरिये से देखते हैं।
निष्कर्ष
डावोस से दिया गया ट्रंप का यह संदेश साफ है—अमेरिका NATO के साथ खड़ा है, लेकिन वह चाहता है कि उसके सहयोगी भी उतनी ही जिम्मेदारी अपने कंधों पर लें।

