एक अरब, चालीस करोड़ का बाज़ार, नई डील: भारत-न्यूज़ीलैंड FTA पर पीएम लक्सन

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भारत की तेज़ी से बढ़ती फ्री ट्रेड रणनीति को इस हफ्ते बड़ी कामयाबी मिली, जब न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री Christopher Luxon ने X पर घोषणा की कि उनकी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में ही भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) हासिल कर लिया है। लक्सन ने इसे 1.4 अरब उपभोक्ताओं तक पहुंच, नए रोज़गार, बेहतर आय और निर्यात के लिए बड़ा मौका बताया।

यह घोषणा ऐसे समय आई, जब भारत और न्यूज़ीलैंड ने संयुक्त रूप से एक व्यापक FTA पर बातचीत पूरी होने की पुष्टि की। यह भारत के सबसे तेज़ी से निपटे व्यापार समझौतों में से एक है, जिसका लक्ष्य पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करना और अगले 15 वर्षों में न्यूज़ीलैंड से USD 20 बिलियन का निवेश आकर्षित करना है।

लक्सन ने X पर लिखा, “हमने कहा था कि पहले कार्यकाल में भारत के साथ FTA करेंगे, और हमने कर दिखाया। यह ऐतिहासिक समझौता ज्यादा नौकरियों, ऊंची आय और निर्यात के नए अवसर खोलेगा।”

तेज़ रफ्तार बातचीत, बड़े लक्ष्य

यह समझौता इस साल भारत का तीसरा FTA है—जुलाई में यूके और इस महीने की शुरुआत में ओमान के साथ करार के बाद। बातचीत मार्च 2025 में लक्सन की भारत यात्रा के दौरान शुरू हुई और सिर्फ नौ महीनों में पूरी हो गई, जिसे दोनों पक्षों ने मज़बूत राजनीतिक इच्छाशक्ति का नतीजा बताया।

प्रधानमंत्री Narendra Modi और लक्सन ने फोन पर बातचीत के बाद इस “ऐतिहासिक, महत्वाकांक्षी और परस्पर लाभकारी” समझौते की घोषणा की। उम्मीद है कि FTA 2026 की पहली छमाही में साइन होगा और घरेलू प्रक्रियाएं पूरी होने के 7–8 महीनों के भीतर लागू हो जाएगा।

व्यापार का गणित

FTA लागू होने के बाद पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को USD 5 बिलियन तक ले जाने का लक्ष्य है। 2024–25 में माल व्यापार USD 1.3 बिलियन रहा, जबकि वस्तुओं और सेवाओं का कुल व्यापार करीब USD 2.4 बिलियन था—जिसे यात्रा, आईटी और बिज़नेस सर्विसेज़ ने आगे बढ़ाया।

भारत को क्या मिलेगा

समझौते के तहत न्यूज़ीलैंड, लागू होने की तारीख से भारत के 100% निर्यात को ड्यूटी-फ्री एक्सेस देगा। इससे टेक्सटाइल, अपैरल, लेदर गुड्स, कार्पेट, सिरेमिक, ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स सहित करीब 450 टैरिफ लाइनों पर लगने वाला 10% तक का शुल्क खत्म होगा।

टेक्सटाइल, अपैरल, लेदर, फुटवियर, जेम्स-ज्वेलरी जैसे श्रम-प्रधान सेक्टरों के साथ-साथ इंजीनियरिंग गुड्स, फार्मा, प्लास्टिक, रबर और प्रोसेस्ड फूड्स को भी बढ़त मिलने की उम्मीद है। फार्मा और मेडिकल डिवाइस निर्यातकों के लिए GMP/GCP निरीक्षण रिपोर्ट की मान्यता से रेगुलेटरी मंज़ूरी तेज़ होगी और लागत घटेगी।

इसके अलावा, भारत को न्यूज़ीलैंड में अस्थायी रोज़गार के ज्यादा रास्ते मिलेंगे। एक नया वीज़ा रूट हर साल 5,000 भारतीय प्रोफेशनल्स को तीन साल तक आईटी, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर, एजुकेशन और कंस्ट्रक्शन जैसे क्षेत्रों में काम की अनुमति देगा। इसमें भारतीय शेफ, योग प्रशिक्षक, AYUSH प्रैक्टिशनर और म्यूज़िक टीचर्स भी शामिल हैं। साथ ही, हर साल 1,000 युवाओं के लिए वर्किंग हॉलीडे वीज़ा और खासकर STEM छात्रों के लिए बेहतर पोस्ट-स्टडी वर्क अधिकार मिलेंगे।

संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा

जहां न्यूज़ीलैंड के करीब 95% निर्यात पर भारत में टैरिफ कम या खत्म होंगे, वहीं नई दिल्ली ने किसानों और MSMEs की सुरक्षा के लिए कुछ सेक्टर रिंग-फेंस किए हैं। दूध, क्रीम, व्हे, दही, चीज़ जैसे डेयरी उत्पादों पर कोई रियायत नहीं होगी। प्याज़, चीनी, मसाले, खाद्य तेल, रबर, जेम्स-ज्वेलरी, हथियार-गोला-बारूद, तांबा और एल्युमिनियम भी बाहर रखे गए हैं।

हालांकि, न्यूज़ीलैंड को कीवीफ्रूट और सेब पर कोटा-आधारित रियायतें मिलेंगी, साथ ही शीप मीट, ऊन, कोयला, वानिकी व लकड़ी उत्पाद, वाइन, कुछ सीफ़ूड, चेरी, एवोकाडो, मनुका हनी और मिल्क एल्ब्यूमिन्स तक बेहतर पहुंच मिलेगी।

निवेश, खेती और आगे की राह

इस समझौते का अहम स्तंभ न्यूज़ीलैंड का अगले 15 वर्षों में USD 20 बिलियन निवेश का वादा है—जो मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, सर्विसेज़, इनोवेशन और रोज़गार सृजन में जाएगा। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने कहा कि इससे घरेलू मैन्युफैक्चरिंग मज़बूत होगी और नौकरियां बनेंगी।

कृषि क्षेत्र में कीवीफ्रूट, सेब और शहद के लिए एग्री-टेक एक्शन प्लान लाया जाएगा—जिसमें सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, बेहतर प्लांटिंग मटीरियल, क्षमता निर्माण और पोस्ट-हार्वेस्ट व फूड सेफ्टी पर तकनीकी सहयोग शामिल है। न्यूज़ीलैंड ने 18 महीनों में अपने क़ानूनों में बदलाव कर भारत की वाइन और स्पिरिट्स को GI के तहत रजिस्ट्रेशन की सुविधा देने पर भी सहमति दी है। AYUSH, फिशरीज, ऑडियो-विज़ुअल सर्विसेज़, टूरिज़्म, फॉरेस्ट्री, हॉर्टिकल्चर और पारंपरिक ज्ञान में सहयोग भी तय हुआ है।

रणनीतिक संदेश

लक्सन ने इसे “व्यापक और महत्वपूर्ण लाभ” बताते हुए कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी आबादी और सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था होने के नाते भारत, कीवी निर्यातकों और कामगारों के लिए बड़ा अवसर है। भारतीय पक्ष इसे ओशिनिया क्षेत्र में निर्यात बाज़ारों के विविधीकरण का जरिया मानता है, खासकर तब जब पारंपरिक बाज़ारों में टैरिफ चुनौतियां बनी हुई हैं।

गौरतलब है कि यह NDA सरकार द्वारा अंतिम रूप दिया गया सातवां व्यापार समझौता है और पहला ऐसा FTA है जिसमें भारत की पूरी वरिष्ठ वार्ता टीम महिलाओं की रही—जिसका नेतृत्व संयुक्त सचिव पेटल ढिल्लों ने किया। इसके साथ भारत अब Five Eyes गठबंधन के तीन सदस्यों—ऑस्ट्रेलिया, यूके और न्यूज़ीलैंड—के साथ FTA कर चुका है; अमेरिका से बातचीत उन्नत चरण में है और कनाडा से चर्चा फिर शुरू होने की तैयारी है।

सारांश

  • तेज़ रफ्तार बातचीत, बड़े लक्ष्य
  • व्यापार का गणित
  • भारत को क्या मिलेगा
  • संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा
  • रणनीतिक संदेश

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T20 वर्ल्ड कप 2026 में बांग्लादेश पर मंडराया बाहर होने का खतरा, ICC ने दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम

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2026 के T20 वर्ल्ड कप में बांग्लादेश की राह लगभग बंद होती दिख रही है। भारत में अपने मुकाबले कराने से इनकार करने की बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) की मांग उलटी पड़ गई है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) की आखिरी समय पर दिखाई गई एकजुटता भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के फैसले को बदलने में नाकाम रही।

आपात बैठक और वोटिंग का फैसला

बुधवार, 21 जनवरी को ICC बोर्ड की एक आपात वर्चुअल बैठक हुई, जिसमें बांग्लादेश की अपील पर चर्चा की गई। 16 सदस्यीय बोर्ड में से सिर्फ दो देशों—पाकिस्तान और बांग्लादेश—ने मांग के समर्थन में वोट किया। बाकी सभी सदस्यों ने अनुरोध खारिज कर दिया।

24 घंटे का समय, नहीं तो बाहर

बैठक के बाद ICC ने BCB को अंतिम चेतावनी दी। बोर्ड को 24 घंटे के भीतर यह तय करना होगा कि टीम 7 फरवरी से 8 मार्च के बीच होने वाले वर्ल्ड कप के लिए भारत जाएगी या नहीं। अगर बांग्लादेश तय समय में हामी नहीं भरता, तो उसकी जगह किसी दूसरे देश को टूर्नामेंट में शामिल किया जाएगा। माना जा रहा है कि ऐसी स्थिति में ग्रुप C में स्कॉटलैंड को मौका मिल सकता है। अब BCB को अंतिम फैसला लेने के लिए अपनी सरकार से भी सलाह करनी होगी।

सुरक्षा को लेकर ICC का रुख

ICC ने बैठक में सुरक्षा से जुड़े सभी आकलनों की समीक्षा की, जिनमें स्वतंत्र एजेंसियों की रिपोर्ट भी शामिल थी। बोर्ड का कहना है कि भारत में बांग्लादेशी खिलाड़ियों, फैंस, मीडिया और अधिकारियों के लिए किसी भी तरह का विश्वसनीय खतरा नहीं पाया गया है। इसी वजह से मैचों को श्रीलंका शिफ्ट करने की मांग को खारिज कर दिया गया।

ग्रुप बदलने की योजना भी नाकाम

BCB ने आयरलैंड के साथ ग्रुप स्वैप का सुझाव भी दिया था, क्योंकि आयरलैंड अपने सभी मैच श्रीलंका में खेल रहा है। हालांकि यह प्रस्ताव शुरुआत से ही कमजोर माना जा रहा था। उसी दिन क्रिकेट आयरलैंड ने साफ कर दिया था कि उन्हें ICC से आश्वासन मिला है कि उनका शेड्यूल नहीं बदलेगा। बैठक में भी यही बात दोहराई गई।

ICC का आधिकारिक बयान

बोर्ड मीटिंग के बाद ICC ने एक बयान जारी करते हुए कहा,
“सभी सुरक्षा जांचों और स्वतंत्र रिपोर्टों के मुताबिक, भारत के किसी भी टूर्नामेंट स्थल पर बांग्लादेशी खिलाड़ियों, मीडिया कर्मियों, अधिकारियों और प्रशंसकों की सुरक्षा को लेकर कोई विश्वसनीय खतरा नहीं पाया गया है।”

मुस्ताफिजुर और IPL विवाद पर प्रतिक्रिया

ICC के एक प्रवक्ता ने यह भी साफ किया कि BCB द्वारा मुस्ताफिजुर रहमान के IPL से बाहर होने को सुरक्षा मुद्दे से जोड़ना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले कई हफ्तों से ICC और BCB के बीच लगातार बातचीत चल रही थी, जिसमें सुरक्षा रिपोर्ट, स्थल-स्तरीय सुरक्षा योजनाएं और मेजबान देशों से औपचारिक आश्वासन साझा किए गए। इन सभी में यही निष्कर्ष निकला कि भारत में बांग्लादेशी टीम की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस खतरा नहीं है।

आखिरी मोड़ पर टूर्नामेंट की तस्वीर

अब गेंद BCB के पाले में है। अगले 24 घंटे यह तय करेंगे कि बांग्लादेश T20 वर्ल्ड कप 2026 का हिस्सा रहेगा या उसकी जगह किसी और टीम को मौका मिलेगा। ICC का संदेश साफ है—सुरक्षा के आधार पर मैचों के स्थान में बदलाव की कोई गुंजाइश नहीं है।

Image Credit: ICC (International Cricket Council)

Q1. बांग्लादेश को T20 वर्ल्ड कप 2026 से बाहर होने का खतरा क्यों है?

बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने भारत में अपने मैच खेलने से इनकार किया है और उन्हें किसी दूसरे देश में शिफ्ट करने की मांग की है। ICC ने इस मांग को खारिज कर दिया है और बांग्लादेश को तय समय में फैसला लेने के लिए अल्टीमेटम दिया है।

Q2. ICC ने बांग्लादेश को कितना समय दिया है?

ICC ने BCB को 24 घंटे का समय दिया है। अगर इस दौरान बांग्लादेश टीम भारत जाने के लिए तैयार नहीं होती, तो उसे टूर्नामेंट से बाहर किया जा सकता है।

Q3. अगर बांग्लादेश बाहर होता है तो उसकी जगह कौन ले सकता है?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को ग्रुप C में शामिल किया जा सकता है।

Q4. ICC ने सुरक्षा को लेकर क्या कहा है?

ICC का कहना है कि सभी सुरक्षा आकलनों और स्वतंत्र रिपोर्टों में यह पाया गया है कि भारत में बांग्लादेशी खिलाड़ियों, अधिकारियों, मीडिया और फैंस के लिए कोई विश्वसनीय खतरा नहीं है।

Q5. पाकिस्तान ने इस मुद्दे पर क्या भूमिका निभाई?

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने बांग्लादेश की मांग का समर्थन किया था, लेकिन ICC बोर्ड की बैठक में सिर्फ पाकिस्तान और बांग्लादेश ने ही इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया।

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