फर्जी Army ID कार्ड से सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी! Vadodara में दो आरोपी गिरफ्तार, जांच में सामने आए कई नाम

Share

Vadodara Fake Army ID Case: गुजरात के Vadodara में पुलिस ने भारतीय सेना के पूर्व सैनिकों के फर्जी पहचान पत्र और अन्य दस्तावेजों का इस्तेमाल कर निजी सिक्योरिटी कंपनियों में नौकरी हासिल करने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई वडोदरा सिटी पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने मिली विशेष सूचना के आधार पर की।

पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपियों के पास भारतीय सेना से जुड़े कई कथित फर्जी दस्तावेज मिले हैं। जांच में सामने आया कि दोनों में से किसी ने भी भारतीय सेना में सेवा नहीं दी थी। मामले में दो अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आई है, जिनकी तलाश की जा रही है।

कौन हैं गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी?

पुलिस ने आरोपियों की पहचान धीरेंद्रसिंह हाल (Dhirendrasingh Haal), जिन्हें धीरेंद्रसिंह हरिसिंह के नाम से भी बताया गया है, और भूपेंद्रसिंह गौतम (Bhupendrasingh Gautam) के रूप में की है। भूपेंद्रसिंह का नाम कुछ रिपोर्टों में भूपेंद्रसिंह शिवकुमारसिंह गौतम या भूपेंद्रसिंह गौतम राजपूत भी बताया गया है।

गुजराती मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दोनों उत्तर प्रदेश के फतेहपुर के निवासी हैं। पुलिस ने धीरेंद्रसिंह को वडोदरा के गोरवा रोड स्थित परिश्रमपार्क सोसाइटी से और भूपेंद्रसिंह को करोदिया इलाके की सिकोटरधाम सोसाइटी से हिरासत में लिया।

सेना के कई दस्तावेज बरामद

तलाशी और पूछताछ के दौरान पुलिस ने कथित तौर पर कई फर्जी दस्तावेज बरामद किए। इनमें शामिल हैं:

  • भारतीय सेना की सर्विस बुक
  • सर्विस सर्टिफिकेट
  • डिपेंडेंट सर्टिफिकेट
  • पेंशन कार्ड
  • पूर्व सैनिकों के फर्जी पहचान पत्र

जांच में पुष्टि हुई कि गिरफ्तार किए गए दोनों लोगों ने भारतीय सेना में कभी सेवा नहीं दी थी। आरोप है कि उन्होंने इन दस्तावेजों का इस्तेमाल निजी सुरक्षा एजेंसियों में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी पाने के लिए किया।

बताया गया है कि दोनों ने शहर की महेसाणा, यूनिवर्सल और सैनिक सिक्योरिटी फर्मों में नौकरी हासिल करने के लिए कथित तौर पर इन फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया।

पूछताछ में दस्तावेज कहां से मिले, इस पर क्या पता चला?

पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि उन्होंने बिचौलियों के जरिए ये फर्जी दस्तावेज हासिल किए थे।

मामले में एक स्थानीय सिक्योरिटी फर्म से जुड़े कैप्टन सोनावणे और अजयसिंह चौहान के नाम भी सामने आए हैं। पुलिस ने इन दोनों को भी कथित फर्जीवाड़े में शामिल बताया है। फिलहाल वे फरार हैं और उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

Vadodara

गोरवा पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज

इस मामले में गोरवा पुलिस स्टेशन में जालसाजी का केस दर्ज किया गया है। जांच अधिकारी अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि दस्तावेज कहां और कैसे तैयार किए गए, क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है और क्या सेना से जुड़े अन्य फर्जी दस्तावेज भी बनाए गए हैं।

पुलिस के अनुसार, सेना के पूर्व सैनिकों के फर्जी पहचान पत्र रखना और उनका इस्तेमाल करना सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय है। ऐसे दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल संवेदनशील स्थानों तक पहुंच बनाने या किसी व्यक्ति की पहचान को लेकर भ्रम पैदा करने के लिए किया जा सकता है।

जांच में आगे क्या?

Vadodara का यह मामला सैन्य पहचान पत्रों और संबंधित दस्तावेजों के कथित दुरुपयोग को लेकर उठने वाली सुरक्षा चिंताओं को सामने लाता है। फिलहाल पुलिस फर्जी दस्तावेजों के स्रोत, आरोपियों को मदद देने वाले लोगों और संभावित नेटवर्क की जांच कर रही है।

फिलहाल दो आरोपी गिरफ्तार हैं, जबकि मामले में नाम सामने आए दो अन्य लोगों की तलाश जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही इस कथित फर्जीवाड़े के पूरे नेटवर्क और उसकी वास्तविक सीमा का पता चल सकेगा।

1. Vadodara में पुलिस ने किन आरोपियों को गिरफ्तार किया है?

Vadodara सिटी पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने धीरेंद्रसिंह हाल और भूपेंद्रसिंह गौतम को फर्जी भारतीय सेना के पूर्व सैनिक पहचान पत्रों के इस्तेमाल के आरोप में गिरफ्तार किया है।

2. दोनों आरोपियों को किस आरोप में गिरफ्तार किया गया है

दोनों पर भारतीय सेना के पूर्व सैनिकों के फर्जी ID कार्ड और संबंधित दस्तावेजों का इस्तेमाल करके निजी सिक्योरिटी कंपनियों में नौकरी हासिल करने का आरोप है।

3. पुलिस को आरोपियों के पास से कौन-कौन से दस्तावेज मिले?

पुलिस ने कथित तौर पर सेना की सर्विस बुक, सर्विस सर्टिफिकेट, डिपेंडेंट सर्टिफिकेट, पेंशन कार्ड और फर्जी एक्स-सर्विसमैन ID कार्ड बरामद किए हैं।

4. क्या दोनों आरोपी भारतीय सेना में काम कर चुके थे?

जांच के अनुसार, दोनों आरोपियों ने कभी भारतीय सेना में सेवा नहीं दी थी।

5. आरोपियों ने किन सिक्योरिटी कंपनियों में नौकरी हासिल की थी?

रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपियों ने महेसाणा, यूनिवर्सल और सैनिक सिक्योरिटी फर्मों में नौकरी पाने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया।

8. इस मामले में पुलिस ने कहां केस दर्ज किया है?

फर्जी दस्तावेजों से जुड़े जालसाजी के मामले में Vadodara के गोरवा पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया है।

Next Post

REPL को काशीपुर नगर निगम से मिला ₹220 करोड़ का प्रोजेक्ट, 29 साल से ज्यादा की होगी रियायत अवधि

Share

Rudrabhishek Enterprises Limited (REPL) के लिए कारोबार से जुड़ी बड़ी खबर है। कंपनी ने New Modern Buildwell Pvt. Ltd. (NMBPL) के साथ कंसोर्टियम में उत्तराखंड के काशीपुर नगर निगम से करीब ₹220 करोड़ का कंसल्टेंसी और कंस्ट्रक्शन कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया है। यह प्रोजेक्ट Urban Challenge Fund (UCF) के तहत काशीपुर के नगर निगम परिसर के विकास से जुड़ा है।

कंपनी ने 21 अक्टूबर 2026 को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को इसकी जानकारी दी। प्रोजेक्ट को DBFOT (Design-Build-Finance-Operate-Transfer) मॉडल के तहत पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) में विकसित किया जाएगा।

काशीपुर में क्या-क्या बनेगा?

इस प्रोजेक्ट के तहत नगर निगम परिसर में कई तरह की व्यावसायिक और सार्वजनिक सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव है। इनमें शामिल हैं:

व्यवस्थित कमर्शियल दुकानें(Organized Commercial Shops)
मल्टी-लेवल पार्किंग(Multi-Level Parking)
आंतरिक सड़कें और सर्कुलेशन रोड(Internal Roads and Circulation Roads)
आधुनिक फसाड और इंफ्रास्ट्रक्चर(Modern Facade and Infrastructure)
AI और टेक्नोलॉजी इनोवेशन सेंटर(AI and Technology Innovation Centres)
फूड कोर्ट और पब्लिक प्लाजा(Food Court and Public Plaza)
होटल और एंटरटेनमेंट जोन(Hotels and Entertainment Zones)
मल्टीप्लेक्स(Multiplex)
नगर निगम का ऑफिस ब्लॉक(Municipal Corporation Office Block)
ग्रेड-A ऑफिस स्पेस(Grade-A Office Space)
स्ट्रीटस्केप सुधार और स्मार्ट यूटिलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर(Streetscape Improvements and Smart Utility Infrastructure)

इस विकास योजना का उद्देश्य नगर निगम परिसर में व्यावसायिक गतिविधियों और सार्वजनिक सुविधाओं को एक साथ विकसित करना है।

प्रोजेक्ट की लागत और अनुमानित कमाई

REPL की एक्सचेंज फाइलिंग में प्रोजेक्ट की कुल लागत और अनुमानित राजस्व की जानकारी भी दी गई है।

ParticularsDetails
Awarding AuthorityKashipur Municipal Corporation, Government of Uttarakhand
Project Cost₹220 crore, inclusive of GST
Estimated RevenueApproximately ₹300 crore, inclusive of GST
Construction PeriodApproximately 36 months
Concession Period29 years and 11 months
Extension OptionExtendable by a further 29 years and 11 months
Project TypeDomestic
Nature of ContractFeasibility, planning, designing, redevelopment, construction, upgradation, strengthening, operation and maintenance
REPL

DBFOT और PPP मॉडल पर होगा विकास

यह प्रोजेक्ट DBFOT मॉडल के तहत तैयार किया जाएगा। इस व्यवस्था में डिजाइन और निर्माण के साथ वित्तपोषण, संचालन और बाद में हस्तांतरण की जिम्मेदारियां तय शर्तों के अनुसार निभाई जाती हैं। इसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP मॉडल में लागू किया जाएगा। कंपनी की फाइलिंग के अनुसार, Urban Challenge Fund केंद्र सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य शहरी विकास में बदलाव लाना और शहरों को बाजार आधारित वित्तपोषण तथा एकीकृत क्षेत्रीय विकास की दिशा में प्रोत्साहित करना है। इस योजना के तहत कार्यशील पूंजी केंद्र और राज्य सरकार उपलब्ध कराएंगे, जबकि राजस्व विकसित संपत्तियों की बिक्री के अनुसार सार्वजनिक स्रोतों से प्राप्त होगा।

REPL के लिए क्यों अहम है यह कॉन्ट्रैक्ट?

यह ऑर्डर REPL और उसके कंसोर्टियम पार्टनर के लिए शहरी बुनियादी ढांचे और नगर विकास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है। इसमें योजना बनाने से लेकर निर्माण, संचालन और रखरखाव तक कई तरह के काम शामिल हैं।

कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऑर्डर देने वाली संस्था घरेलू सरकारी निकाय है। फाइलिंग में प्रमोटर या प्रमोटर समूह की कंपनियों के इस इकाई में हित होने की जानकारी नहीं दी गई है। साथ ही, कंपनी ने बताया है कि यह कॉन्ट्रैक्ट संबंधित पक्षों के बीच होने वाला लेनदेन नहीं है।

कुल मिलाकर, काशीपुर का यह प्रोजेक्ट अगले लगभग तीन वर्षों में निर्माण कार्य और उसके बाद लंबी कंसेशन अवधि के लिए विकास, संचालन और रखरखाव से जुड़ा है।

Source :- https://nsearchives.nseindia.com/corporate/REPL_21102026113152_Intimation_Work_Order_Kashipur_Project.pdf 
Next Post

Loading more posts...