Tata Trusts विवाद गहराया: Noel Tata और बेटे Neville ने अब बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया

Share

Tata Trusts विवाद गहराया: Noel Tata और बेटे Neville ने अब बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया

Tata Trusts Boardroom Dispute: टाटा ट्रस्ट्स के प्रशासन और गवर्नेंस को लेकर जारी विवाद अब कानूनी मोर्चे पर और आगे बढ़ गया है। ट्रस्ट के चेयरमैन Noel Tata और उनके बेटे Neville Tata ने बॉम्बे हाई कोर्ट में कैविएट दाखिल की है। इससे करीब एक सप्ताह पहले दोनों ने मुंबई सिटी सिविल कोर्ट में भी इसी तरह की कानूनी प्रक्रिया अपनाई थी। बुधवार को सूत्रों ने NDTV Profit को यह जानकारी दी।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब ट्रस्टी Venu Srinivasan और Vijay Singh ने महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर के समक्ष Sir Dorabji Tata Trust (SDTT) में कथित गवर्नेंस खामियों को लेकर शिकायत दर्ज कराई है।

कैविएट दाखिल करने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संबंधित मामले में अदालत कोई आदेश पारित करने से पहले Noel Tata और Neville Tata को अपना पक्ष रखने का अवसर दे। हालांकि, कैविएट दाखिल होने का मतलब यह नहीं है कि अदालत ने विवाद पर कोई फैसला सुना दिया है या लगाए गए आरोप साबित हो गए हैं।

Noel Tata और Neville Tata ने किन लोगों के खिलाफ दाखिल की कैविएट?

Noel Tata और Neville Tata ने 7 अक्टूबर 2026 को मुंबई सिटी सिविल कोर्ट में कैविएट दाखिल की थी। अब उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट में भी यह कानूनी कदम उठाया है।

सूत्रों के मुताबिक, इन अर्जियों में सह-ट्रस्टी Venu Srinivasan, Vijay Singh, Darius Khambata और Bhaskar Bhat को कैविएट प्राप्त करने वाले पक्षों के रूप में नामित किया गया है। Tata Trusts से जुड़े सूत्रों के अनुसार, Khambata और Bhat को शामिल करना प्रक्रियात्मक कदम है।

कैविएट एक औपचारिक कानूनी नोटिस होता है, जिसके जरिए कोई व्यक्ति अदालत से अनुरोध करता है कि संबंधित मामले में उसके खिलाफ आदेश देने से पहले उसे सुनवाई का मौका दिया जाए। यह अपने आप में किसी विवाद पर फैसला नहीं होता।

SDTT के प्रशासन को लेकर बढ़ती असहमति अब कानूनी और नियामकीय स्तर तक पहुंच गई है।

Tata Trusts को शिकायत का जवाब देने के लिए मिली नई समयसीमा

मंगलवार को महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर ने Tata Trusts को शिकायत का जवाब देने के लिए 19 अक्टूबर तक का अतिरिक्त समय दिया। इससे पहले जवाब दाखिल करने की अंतिम तारीख 12 अक्टूबर थी।

यह शिकायत Venu Srinivasan और Vijay Singh ने दर्ज कराई थी। इसमें Sir Dorabji Tata Trust के गवर्नेंस पर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि Tata Sons से जुड़े कुछ लेनदेन में ट्रस्ट ने एक धर्मार्थ ट्रस्ट के रूप में अपनी भूमिका की सीमाओं का उल्लंघन किया।

सितंबर के अंतिम दिनों में SDTT के ट्रस्टी और Tata Sons के बोर्ड में नॉमिनी डायरेक्टर Venu Srinivasan ने ट्रस्ट के प्रशासन और गवर्नेंस की तत्काल जांच कराने की मांग की थी।

उन्होंने अपनी चिट्ठी का शीर्षक “Illegal and Irregular Appointment of Perpetual Trustee and Serious Governance Lapse” रखा। इसमें उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य SDTT की संस्थागत अखंडता और उचित प्रशासन को बनाए रखना है।

Srinivasan ने जांच पूरी होने तक SDTT के बोर्ड में बदलावों पर रोक लगाने की मांग भी की।

फिलहाल, शिकायत पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। Tata Trusts को अपना जवाब दाखिल करने के लिए 19 अक्टूबर तक का समय मिला है।

Tata Trusts विवाद के बीच Noel Tata और Neville Tata की बॉम्बे हाई कोर्ट में कैविएट दाखिल करने से जुड़ी खबर।

Venu Srinivasan ने ट्रस्ट के कामकाज पर क्यों उठाए सवाल?

Srinivasan की शिकायत के केंद्र में SDTT का Circular Resolution No. 107 है, जिसे 16 सितंबर को प्रसारित किया गया था।

Srinivasan ने आरोप लगाया कि यह प्रस्ताव उन्हें स्वतंत्र रूप से अपनी राय बनाने और मतदान करने से रोकने की असाधारण कोशिश थी। उनका दावा था कि इसका उद्देश्य अन्य ट्रस्टियों से अलग राय रखने के कारण उनकी स्थिति को कमजोर करना था।

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि इस कदम के जरिए ट्रस्ट के भीतर सत्ता को कुछ लोगों के हाथों में केंद्रित करने और Tata Sons के फैसलों को प्रभावित करने की कोशिश की गई।

अपनी चिट्ठी में Srinivasan ने लिखा कि यह SDTT के भीतर सत्ता पर नियंत्रण स्थापित करने और Tata Sons को उपलब्ध विकल्पों का स्वतंत्र मूल्यांकन करने देने के बजाय यह तय करने की कोशिश थी कि कंपनी को क्या करना चाहिए।

उन्होंने इस विवाद को नवंबर 2025 में खुद को बाहर किए जाने की घटना से भी जोड़ा। उनके मुताबिक, दोनों घटनाएं ट्रस्ट के भीतर असहमत विचारों को दबाने और फैसले लेने की शक्ति कुछ चुनिंदा ट्रस्टियों तक सीमित करने के कथित प्रयास का हिस्सा हैं।

यह सभी आरोप Srinivasan की शिकायत में लगाए गए हैं। अभी तक इन्हें किसी नियामकीय या न्यायिक प्राधिकरण की ओर से साबित किए गए निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

चैरिटी कमिश्नर के सामने भी दाखिल हुईं 84 कैविएट

शिकायत के बाद Tata Trusts समूह के अंतर्गत आने वाले कई ट्रस्टों ने महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर के समक्ष कुल 84 कैविएट दाखिल कीं। मामले से परिचित सूत्रों के अनुसार, इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि उनसे जुड़े मामलों में कोई आदेश पारित करने से पहले संबंधित ट्रस्टों को सुनवाई का अवसर मिले।

इस घटनाक्रम पर Clavius Legal के काउंसल Gaurav Singh ने NDTV से कहा कि सिटी सिविल कोर्ट और बॉम्बे हाई कोर्ट में दाखिल कैविएट के साथ चैरिटी कमिश्नर के सामने 84 अतिरिक्त कैविएट यह संकेत देती हैं कि दोनों पक्षों को आशंका है कि Srinivasan और Vijay Singh की शिकायत पर कमिश्नर का फैसला चाहे जो भी हो, उसे चुनौती दी जा सकती है।

उन्होंने बताया कि इस विवाद में दो प्रमुख कानूनी सवाल हैं।

  1. पहला सवाल यह है कि क्या स्थायी ट्रस्टी (Perpetual Trustee) की नियुक्ति महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट में 2025 में किए गए संशोधन के बाद भी वैध रहती है। इस संशोधन के तहत, यदि ट्रस्ट डीड में विशेष प्रावधान नहीं है, तो स्थायी ट्रस्टियों की संख्या ट्रस्ट के कुल बोर्ड के एक-चौथाई तक सीमित होती है।
  2. दूसरा सवाल यह है कि क्या SDTT Circular Resolution No. 107 के जरिए किसी ट्रस्टी को Tata Sons के डायरेक्टर के रूप में मतदान करने से रोक सकता है। इस संदर्भ में Companies Act की धारा 166 महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके तहत प्रत्येक डायरेक्टर को स्वतंत्र निर्णय लेने की आवश्यकता होती है।

इन कानूनी सवालों पर अंतिम स्थिति संबंधित कार्यवाही और लागू प्रावधानों की व्याख्या पर निर्भर करेगी।

आखिर क्या है Tata Trusts और Tata Sons के बीच व्यापक विवाद?

ट्रस्ट के प्रशासन को लेकर चल रहा विवाद Tata Sons के भविष्य से जुड़े बड़े मतभेदों की पृष्ठभूमि में सामने आया है। Tata Sons, Tata Group की होल्डिंग कंपनी है।

Tata Trusts के पास Tata Sons की लगभग 66% हिस्सेदारी है, जबकि Shapoorji Pallonji Group के पास करीब 18.37% हिस्सेदारी है। शेष शेयर Tata Group की कंपनियों और अन्य शेयरधारकों के पास हैं।

इस व्यापक विवाद में Tata Sons को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराने यानी IPO लाने का मुद्दा भी अहम है। Shapoorji Pallonji Group सार्वजनिक लिस्टिंग की मांग करता रहा है, जबकि Noel Tata तत्काल IPO के पक्ष में नहीं हैं। उनका तर्क है कि कोई अंतिम फैसला लेने से पहले दूसरे विकल्पों पर भी विचार किया जाना चाहिए।

लिस्टिंग का मुद्दा नियामकीय आवश्यकताओं से भी जुड़ा हुआ है। सितंबर 2026 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने Tata Sons के उस अनुरोध को खारिज कर दिया था, जिसमें कंपनी ने Core Investment Company के रूप में अपना रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की मांग की थी।

फिलहाल क्या स्थिति है?

Noel Tata और Neville Tata की कैविएट दाखिल करने की कार्रवाई, Venu Srinivasan और Vijay Singh की शिकायत तथा Tata Sons की लिस्टिंग को लेकर मतभेद—ये सभी घटनाएं Tata समूह के भीतर जारी प्रशासनिक और कानूनी विवाद के अलग-अलग पहलुओं को सामने लाती हैं। चैरिटी कमिश्नर के समक्ष शिकायत पर जवाब देने की नई समयसीमा 19 अक्टूबर 2026 है, जबकि आरोपों पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है।

  1. Tata Trusts विवाद क्या है?

    Tata Trusts विवाद Sir Dorabji Tata Trust के गवर्नेंस, ट्रस्टियों की भूमिका और Tata Sons से जुड़े फैसलों को लेकर उठे सवालों से संबंधित है।

  2. Noel Tata और Neville Tata ने बॉम्बे हाई कोर्ट में कैविएट क्यों दाखिल की?

    Tata Trusts विवाद में Noel Tata और Neville Tata ने यह सुनिश्चित करने के लिए कैविएट दाखिल की कि संबंधित मामले में कोई आदेश पारित करने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर मिले।

  3. Venu Srinivasan और Vijay Singh ने क्या शिकायत की है?

    दोनों ट्रस्टियों ने Sir Dorabji Tata Trust के प्रशासन और गवर्नेंस को लेकर महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है।

  4. Tata Trusts को शिकायत का जवाब कब तक देना है?

    महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर ने Tata Trusts को शिकायत का जवाब दाखिल करने के लिए 19 अक्टूबर 2026 तक का समय दिया है।

  5. Tata Trusts के पास Tata Sons की कितनी हिस्सेदारी है?

    Tata Trusts के पास Tata Sons की लगभग 66% हिस्सेदारी है। Shapoorji Pallonji Group के पास करीब 18.37% हिस्सेदारी है।

Next Post

Refex Industries को मिला ₹32.44 करोड़ का बड़ा कॉन्ट्रैक्ट, सरकारी कंपनी से मिला राख के ट्रांसपोर्टेशन का काम

Share

Refex Industries Limited ने 17 अक्टूबर 2026 को स्टॉक एक्सचेंज को सूचित किया कि कंपनी को मिनिस्ट्री ऑफ पावर के अंतर्गत आने वाली एक महारत्न सरकारी कंपनी से राख के परिवहन के लिए रेट कॉन्ट्रैक्ट मिला है। यह कॉन्ट्रैक्ट मिनिस्ट्री ऑफ पावर के अंतर्गत आने वाली एक महारत्न कंपनी से प्राप्त हुआ है, जिसकी अधिकतम कुल वैल्यू GST सहित ₹32.44 करोड़ है।

राख के परिवहन के लिए मिला कॉन्ट्रैक्ट

Refex Industries के अनुसार, इस कॉन्ट्रैक्ट में राख की खुदाई, लोडिंग, परिवहन और डाइक (Dykes) से अनलोडिंग जैसी सेवाएं शामिल हैं। यह काम सरकारी क्षेत्र की एक महारत्न कंपनी के लिए किया जाएगा। कंपनी ने बताया कि यह रेट कॉन्ट्रैक्ट एक साल के लिए वैध रहेगा। जरूरत पड़ने पर इसकी अवधि को अतिरिक्त छह महीने तक बढ़ाया जा सकता है।

Refex Industries

ऑर्डर से जुड़ी अहम जानकारी

ParticularsDetails
CompanyRefex Industries Limited
Order Awarding EntityMaharatna PSU under the Ministry of Power
Maximum Contract Value₹32,44,50,000 (Including GST)
Contract Duration1 Year
Extension PeriodUp to an Additional 6 Months
Scope of WorkAsh Excavation, Loading, Transportation, and Unloading
Order TypeDomestic
Promoter Group InterestNo
Related Party TransactionNo

सरकारी कंपनी के साथ घरेलू कॉन्ट्रैक्ट

कंपनी की एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक, यह कॉन्ट्रैक्ट घरेलू श्रेणी में आता है। इसमें प्रमोटर या प्रमोटर ग्रुप का कोई हित नहीं है। साथ ही, कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह सौदा रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन के अंतर्गत नहीं आता।

Refex Industries ने यह जानकारी SEBI के लिस्टिंग ऑब्लिगेशन एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स (LODR) रेगुलेशन, 2015 के रेगुलेशन 30 के तहत साझा की है।

निष्कर्ष

Refex Industries को मिला यह कॉन्ट्रैक्ट राख के परिवहन और उससे जुड़ी सेवाओं के लिए है। इसकी अधिकतम वैल्यू GST सहित ₹32.44 करोड़ है और शुरुआती अवधि एक साल रखी गई है, जिसे छह महीने तक बढ़ाया जा सकता है।

Source :- https://www.bseindia.com/xml-data/corpfiling/AttachLive/d7776ca9-3a48-4cc4-bf48-fb8ab40c6dc1.pdf

Next Post

Loading more posts...