दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों से कैसे निपटेगी BJP? Modi Government ने तैयार की दोहरी रणनीति, कांग्रेस-राहुल गांधी और AAP पर नजर!
Delhi Protests: दिल्ली में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच बीजेपी और केंद्र सरकार ने कई मोर्चों पर तैयारी शुरू कर दी है। एक तरफ सरकार प्रदर्शनकारियों से बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहती है, तो दूसरी ओर राष्ट्रीय राजधानी में कथित ‘अराजकता’ के मुद्दे पर विपक्ष को राजनीतिक रूप से घेरने की रणनीति भी बना रही है। बीजेपी के निशाने पर खास तौर पर कांग्रेस, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी (AAP) हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) विवाद को लेकर कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी INDIA गठबंधन और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के प्रदर्शन जारी हैं। इसी बीच बीजेपी और केंद्र सरकार हालात से निपटने के लिए कई स्तरों पर काम करती नजर आ रही हैं।
जहां चुनाव आयोग (EC) ने SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए पात्र मतदाताओं को दोबारा शामिल करने के लिए कदम तेज किए हैं, वहीं बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार ने प्रदर्शन के लिए रामलीला मैदान जैसे बड़े स्थान निर्धारित किए हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी छात्रों और युवाओं समेत प्रदर्शनकारियों से बातचीत और संपर्क की संभावनाओं पर भी विचार कर रही है।
चुनाव आयोग से जुड़े मामले पर बीजेपी एक ‘फैक्ट शीट’ तैयार कर रही है। इसमें चुनाव आयुक्तों के बीच असहमति से लेकर देश की मतदाता सूचियों में किए गए बदलावों के आंकड़ों तक की जानकारी शामिल होगी। इसके साथ ही बीजेपी ने राष्ट्रीय राजधानी में कथित ‘अराजकता’ के मुद्दे पर विपक्ष को घेरने की कोशिश की है। पार्टी का खास फोकस कांग्रेस, राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी पर है।
SIR के कारण बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच बीजेपी ने ‘घुसपैठियों’ और ‘जनसांख्यिकीय बदलाव’ के मुद्दे को भी आगे बढ़ाने की कोशिश की है।
द इंडियन एक्सप्रेस की जांच रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग ने उन 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ‘विशेष अभियान’ चलाने का निर्देश दिया, जहां SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इस अभियान का उद्देश्य उन मतदाताओं को सूची में शामिल करना है, जिनके नाम छूट गए हैं।
द इंडियन एक्सप्रेस ने 23 सितंबर को रिपोर्ट दी थी कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने के दौरान कम से कम 14 बार SIR से जुड़े फैसलों और प्रक्रियाओं में गंभीर खामियों पर आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ फैसले उनकी जानकारी के बिना लिए गए थे।
इसके बाद से चुनाव आयोग उन राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) के जरिए मतदाता सूची में दोबारा जोड़े गए नामों के आंकड़े नियमित रूप से साझा कर रहा है, जहां SIR के तहत दावे और आपत्तियां दर्ज करने की प्रक्रिया अभी जारी है।

सोमवार को दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर 2026 के SIR को लेकर जानकारी साझा की। इसके तहत दिल्ली की 1.45 करोड़ मतदाताओं वाली ड्राफ्ट सूची से करीब 47.7 लाख नाम हटाए गए थे।
दिल्ली CEO की पोस्ट के मुताबिक, मतदाता सूची में करीब 33 लाख प्रविष्टियां ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ या ‘अनमैप्ड’ श्रेणी में थीं। इन समस्याओं को सुलझाने के लिए सक्रिय अभियान शुरू किया गया था और अब तक करीब 20 लाख मामलों का समाधान किया जा चुका है।
पोस्ट में कहा गया कि किसी भी शिकायत के लिए लोग 14,947 बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs), 902 सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (AEROs), 70 निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (EROs), 13 जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEOs) या मुख्य निर्वाचन अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। साथ ही भरोसा दिलाया गया कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से बाहर नहीं रहने दिया जाएगा। दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों
इसी तरह, पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों ने भी कहा है कि SIR के दौरान कोई भी पात्र मतदाता छूटना नहीं चाहिए। पश्चिम बंगाल के CEO ने बताया कि राज्य के 24 उप जिला निर्वाचन अधिकारियों ने इस संबंध में सक्रिय अभियान शुरू किया है। वहीं, बिहार के CEO के मुताबिक, राज्य के 38 DEOs इसी काम में जुटे हैं और इसके लिए 90,000 से अधिक विशेष शिविर लगाए जाएंगे। दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों
दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों में लगातार प्रदर्शनों और पुलिस तथा सुरक्षा बलों की कार्रवाई के कारण नई दिल्ली में जनजीवन प्रभावित होने के कुछ दिनों बाद सोमवार को एक और बड़ा कदम उठाया गया। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने एक स्थायी आदेश जारी किया।
इस आदेश के तहत जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में निर्धारित सूची से हटा दिया गया। उसकी जगह तीन नए स्थान तय किए गए हैं—मध्य दिल्ली में रामलीला मैदान, उत्तर दिल्ली में बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली में CBD मैदान। आधिकारिक तौर पर इस कदम का उद्देश्य प्रदर्शनों के कारण आम नागरिकों को होने वाली ‘असुविधा’ कम करना बताया गया है। दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों
Gen Z तक पहुंच बनाने की तैयारी में बीजेपी
इससे पहले जून-जुलाई में CJP ने NEET पेपर लीक मामले को लेकर जंतर-मंतर पर आंदोलन किया था। इस आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था। उस दौरान केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की थी। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने CJP नेताओं अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास के साथ कई दौर की बातचीत की थी। आखिरकार बातचीत के जरिए गतिरोध खत्म करने में सफलता मिली थी।
इसके बाद नरेंद्र Modi Government ने संसद में पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून पारित किया, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) में बदलाव किए और परीक्षा सुधारों के लिए एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया। इस टास्क फोर्स की अगुवाई इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि ने की।
दिल्ली में मौजूदा गतिरोध को लेकर बीजेपी सूत्रों का कहना है कि देश का कानून सभी पर समान रूप से लागू होता है और सरकार केवल उसी के प्रावधानों को लागू कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, सड़क पर प्रदर्शन करने से लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने तक, हर प्रक्रिया कानून के मुताबिक होनी चाहिए। CEC को हटाने के लिए महाभियोग की प्रक्रिया अपनाना जरूरी है।
पार्टी के एक सूत्र ने कहा कि SIR विवाद पर चुनाव आयोग स्थिति स्पष्ट करने के लिए कदम उठा रहा है। वहीं, सरकार ने संवेदनशील नई दिल्ली इलाके में प्रदर्शन कर रहे युवाओं को हटाने के दौरान संयम बरता और उनके खिलाफ आपराधिक या दंडात्मक कार्रवाई का सहारा नहीं लिया। सूत्र के मुताबिक, सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपनी जिम्मेदारी और लोगों के विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।
बीजेपी सूत्र ने आगे कहा कि अगर Modi Government वास्तव में लोगों के विरोध प्रदर्शन करने के मौलिक अधिकार के खिलाफ होती, तो वह रामलीला मैदान जैसे स्थानों को निर्धारित प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित नहीं करती। पार्टी का तर्क है कि ऐसे स्थान तय करने का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कुछ लोगों के सड़क पर विरोध जताने के कारण आम जनता को परेशानी का सामना न करना पड़े।
दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के बीच बीजेपी और Modi Government ने हालात से निपटने के लिए अपनी रणनीति तेज कर दी है। सरकार एक तरफ प्रदर्शनकारियों से बातचीत की संभावना तलाश रही है, वहीं दूसरी ओर दिल्ली में विरोध प्रदर्शन को लेकर विपक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठा रही है।
दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के लिए रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और CBD मैदान जैसे नए स्थान निर्धारित किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य आम नागरिकों को होने वाली परेशानी को कम करना है।
Modi Government की रणनीति पर सबकी नजर
दिल्ली में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच Modi Government यानी मोदी सरकार हालात से निपटने के लिए कई स्तरों पर रणनीति बना रही है। एक तरफ सरकार प्रदर्शनकारियों से बातचीत की संभावनाएं तलाश रही है, तो दूसरी ओर कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर भी जोर दे रही है।
Modi Government ने प्रदर्शन स्थलों में किया बदलाव
Modi Government की रणनीति के तहत दिल्ली में प्रदर्शन के लिए रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और CBD मैदान जैसे स्थान निर्धारित किए गए हैं। इस कदम का उद्देश्य विरोध प्रदर्शनों के कारण आम नागरिकों को होने वाली परेशानी कम करना बताया गया है।
Modi Government और विपक्ष के बीच बढ़ा टकराव
दिल्ली में SIR विवाद को लेकर Modi Government और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक बहस जारी है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि Modi Government के कदमों का बचाव कर रही है।
