India-US Trade Deal पर बड़ा अपडेट: 99% काम पूरा, कुछ हफ्तों में समझौते की उम्मीद; मार्को रुबियो ने टैरिफ और वीजा पर क्या कहा?
भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही ट्रेड डील अब अंतिम चरण में पहुंचती दिख रही है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि समझौते का करीब 99% काम पूरा हो चुका है और इसे अंतिम रूप देने में अब महीनों नहीं, बल्कि कुछ हफ्तों का समय लग सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी टैरिफ और वीजा प्रतिबंध भारत को निशाना बनाकर नहीं लगाए गए हैं।
The Indian Express को दिए एक विशेष इंटरव्यू में रुबियो ने भारत-अमेरिका संबंधों, रूस से तेल खरीद, चीन के साथ व्यापारिक तनाव, पाकिस्तान के साथ अमेरिकी रिश्तों और ऊर्जा सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी। भारत की अपनी दूसरी यात्रा के दौरान उन्होंने दोनों देशों के संबंधों को सकारात्मक बताया और कहा कि व्यापार समझौते को आगे बढ़ाना अमेरिकी विदेश नीति की प्राथमिकताओं में शामिल है।
India-US Trade Deal: 99% काम पूरा, अब क्या है बाकी?
मार्को रुबियो के मुताबिक, भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत पिछले डेढ़ साल से अधिक समय से जारी है। उन्होंने कहा कि दोनों देश समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं।
रुबियो ने बताया कि बाकी बचे मतभेद मुख्य रूप से समझौते में इस्तेमाल किए गए शब्दों और वाक्यांशों के अर्थ से जुड़े हैं। उन्होंने इन्हें केवल तकनीकी मुद्दे कहने से परहेज किया और कहा कि दोनों पक्षों के लिए समझौते की शर्तों को पूरी तरह समझना और उनसे सहमत होना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि समझौते का 99% काम पूरा हो चुका है, लेकिन अंतिम रूप देने के लिए 100% सहमति आवश्यक है। उनके अनुसार, ट्रेड डील को पूरा होने में महीनों नहीं, बल्कि कुछ हफ्ते लग सकते हैं।
रूसी तेल पर टैरिफ और भारत-अमेरिका संबंध
रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी टैरिफ और प्रतिबंधों को लेकर रुबियो ने माना कि ऐसे फैसलों का भारत के साथ आर्थिक संबंधों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति को सावधानी से संभालने की जरूरत है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल खरीद से जुड़े टैरिफ के मामले में छूट देने का फैसला किया था। रुबियो के मुताबिक, ट्रंप को इस फैसले के लिए अमेरिका में आलोचना का सामना भी करना पड़ा, क्योंकि उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस द्वारा पारित कानून के तहत आवश्यक टैरिफ नहीं लगाए।
रुबियो ने कहा कि इस फैसले के पीछे एक अहम कारण भारत के साथ महत्वपूर्ण संबंधों पर पड़ने वाले संभावित नकारात्मक असर को समझना भी था।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी टैरिफ का उद्देश्य भारत को सजा देना या नुकसान पहुंचाना नहीं है। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका चाहता है कि यह संघर्ष समाप्त हो और संबंधित पक्ष बातचीत के जरिए समाधान तक पहुंचें। हालांकि, टैरिफ के जरिए दबाव बनाने से दूसरे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों पर तनाव पैदा हो सकता है।
चीन पर अमेरिका का रुख: क्या ट्रंप प्रशासन नरम है?
चीन के प्रति ट्रंप प्रशासन के कथित नरम रवैये पर सवाल पूछे जाने पर रुबियो ने कहा कि इसे ‘नरम’ कहना सही नहीं होगा। उन्होंने चीन को एक बड़ी अर्थव्यवस्था और शक्तिशाली देश बताते हुए कहा कि अमेरिका को उसके साथ संबंध बनाए रखने हैं, लेकिन इन संबंधों में संतुलन भी जरूरी है।
रुबियो के मुताबिक, अमेरिका और चीन के बीच कई अहम मुद्दों पर टकराव है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि चीन के कुछ कदम उसके राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचाते हैं। इसी वजह से अमेरिका निर्यात नियंत्रण जैसे उपायों के जरिए इन गतिविधियों पर लगाम लगाने की कोशिश कर रहा है।
रुबियो के अनुसार, अमेरिका की कोशिश चीन के साथ रणनीतिक स्थिरता बनाए रखने की है, ताकि मतभेद बड़े संघर्ष में न बदलें। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए विनाशकारी हो सकता है और भारत सहित लगभग हर देश पर इसका असर पड़ेगा।

H-1B वीजा और इमिग्रेशन नियमों पर क्या बोले रुबियो?
अमेरिका में भारतीय छात्रों, पेशेवरों और बड़े भारतीय प्रवासी समुदाय के बीच वीजा प्रतिबंधों को लेकर चिंताओं पर रुबियो ने कहा कि हर संप्रभु देश के लिए अपने इमिग्रेशन कानून लागू करना जरूरी है।
उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रपति जो बाइडेन के चार साल के कार्यकाल सहित पिछले कई वर्षों के दौरान अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम की अनदेखी हुई और करीब 2 करोड़ लोग गैरकानूनी तरीके से अमेरिका में दाखिल हुए। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ इमिग्रेशन कार्यक्रमों का दुरुपयोग हुआ है।
रुबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी प्रशासन के कदम भारत के खिलाफ नहीं हैं। उनके मुताबिक, भारत की विकसित अर्थव्यवस्था और दोनों देशों के मजबूत संबंधों के कारण कुछ वीजा श्रेणियों में बड़ी संख्या में भारतीय आवेदन करते हैं, लेकिन मौजूदा बदलाव वैश्विक स्तर पर इमिग्रेशन सिस्टम को सुधारने के लिए किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अमेरिका विदेशी छात्रों, पर्यटकों, निवेशकों और वहां अस्थायी रूप से काम करने आने वाले लोगों का स्वागत करना चाहता है। हालांकि, इसके लिए सभी को निर्धारित कानूनों और प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।
रुबियो ने कहा कि गैरकानूनी तरीके से लोगों का अमेरिका में प्रवेश करना, कानूनी इमिग्रेशन व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी प्रशासन इमिग्रेशन सिस्टम में सुधार कर रहा है, ताकि नियमों के तहत अमेरिका आने वाले लोगों के लिए प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और लंबे समय तक प्रभावी बनी रह सके।
पाकिस्तान के साथ रिश्तों पर भारत को भरोसा
पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व के साथ ट्रंप प्रशासन के संबंधों को लेकर भारत में उठ रही चिंताओं पर रुबियो ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियां 1970 के दशक के शीत युद्ध के दौर से काफी अलग हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान या दुनिया के किसी भी दूसरे देश के साथ अमेरिका के संबंध भारत के साथ उसकी साझेदारी की कीमत पर नहीं होंगे।
रुबियो ने कहा कि अमेरिका के लिए पाकिस्तान के साथ संबंध बनाए रखना भी जरूरी है। उन्होंने यह संभावना भी जताई कि इन संबंधों और अमेरिकी प्रभाव का इस्तेमाल ऐसे कदमों को रोकने में सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए किया जा सकता है, जो संघर्ष की स्थिति पैदा कर सकते हैं।
हालांकि, उन्होंने दोहराया कि भारत के साथ अमेरिकी संबंधों को किसी तीसरे देश के साथ रिश्तों के मुकाबले नहीं देखा जाता।
रिलायंस, जामनगर और ऊर्जा सहयोग पर क्या है अमेरिकी योजना?
भारत यात्रा के दौरान गुजरात के जामनगर में रिलायंस के साथ ऊर्जा सहयोग पर चर्चा भी रुबियो के एजेंडे में शामिल थी। रिलायंस के टेक्सास में रिफाइनरी निवेश और अंबानी परिवार के साथ बैठक को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने एलन मस्क की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि मस्क एक निजी नागरिक हैं और उन्हें अपनी बात रखने का अधिकार है।
ऊर्जा सहयोग पर बात करते हुए रुबियो ने कहा कि दुनिया के लिए ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना महत्वपूर्ण है। उन्होंने ऐसी व्यवस्था की जरूरत बताई, जिसमें वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बहुत बड़ा हिस्सा संघर्ष की आशंका वाले किसी एक क्षेत्र पर निर्भर न हो।
उन्होंने कहा कि भारत और रिलायंस के पास तेल शोधन की महत्वपूर्ण क्षमता है। वेनेजुएला में भारी कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ने की संभावना का जिक्र करते हुए रुबियो ने बताया कि इस तरह के तेल को दुनिया के कुछ ही स्थानों पर रिफाइन किया जा सकता है। अमेरिका के गल्फ कोस्ट के अलावा भारत और रिलायंस भी ऐसे प्रमुख विकल्पों में शामिल हैं।
रुबियो के मुताबिक, इससे पश्चिमी गोलार्ध में विकसित हो रहे ऊर्जा संसाधनों का इस्तेमाल बढ़ाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने अमेरिका में रिलायंस के निवेश को भी महत्वपूर्ण बताया और कहा कि जामनगर की यात्रा ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग तथा नए अवसरों की पहचान करने का मौका है।
रूस-यूक्रेन युद्ध में भारत की भूमिका पर अमेरिका का रुख
रूस-यूक्रेन युद्ध में संघर्षविराम के लिए भारत की पहल पर रुबियो ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत की कूटनीतिक कोशिशें उपयोगी हो सकती हैं और अमेरिका इस भागीदारी का स्वागत करता है।
रुबियो ने बताया कि उन्होंने करीब डेढ़ सप्ताह पहले भारतीय पक्ष की ओर से तैयार किए गए प्रस्ताव का मसौदा देखा था। उन्होंने भारत के कूटनीतिक अधिकारियों की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने दोनों पक्षों को करीब लाने के लिए अच्छा काम किया है।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि काला सागर क्षेत्र में संघर्षविराम की कोशिशों के सामने कठिनाइयां हैं, क्योंकि वहां हो रहे हमलों का युद्ध में शामिल पक्षों के लिए रणनीतिक महत्व है।
India-US Trade Deal पर अब सबकी नजर
मार्को रुबियो के बयान से संकेत मिलता है कि भारत और अमेरिका व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के काफी करीब हैं। उन्होंने टैरिफ और वीजा प्रतिबंधों को भारत के खिलाफ कदम मानने से इनकार किया और दोनों देशों के संबंधों को अमेरिकी विदेश नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
हालांकि, समझौते की शेष शर्तों पर पूरी सहमति बनना अभी जरूरी है। आने वाले हफ्तों में दोनों देशों की बातचीत यह तय करेगी कि लंबे समय से जारी India-US Trade Deal को कब अंतिम रूप दिया जा सकता है।
India-US Trade Deal पर ताजा अपडेट क्या है?
India-US Trade Deal को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि समझौते का लगभग 99% काम पूरा हो चुका है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बाकी शर्तों पर सहमति बनने के बाद इसे कुछ हफ्तों में अंतिम रूप दिया जा सकता है।
India-US Trade Deal कब तक फाइनल हो सकती है?
मार्को रुबियो के अनुसार, India-US Trade Deal को पूरा होने में महीनों के बजाय कुछ हफ्ते लग सकते हैं। हालांकि, समझौते की आधिकारिक तारीख अभी घोषित नहीं हुई है।
India-US Trade Deal में अमेरिकी टैरिफ को लेकर क्या कहा गया?
रुबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी टैरिफ का उद्देश्य भारत को निशाना बनाना नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच महत्वपूर्ण आर्थिक संबंधों को बनाए रखना जरूरी है।
India-US Trade Deal से भारतीय कारोबारियों को क्या फायदा हो सकता है?
India-US Trade Deal के तहत टैरिफ, बाजार तक पहुंच और व्यापारिक नियमों में बदलाव से भारतीय कारोबारियों के लिए नए अवसर बन सकते हैं। इसका वास्तविक असर समझौते की अंतिम शर्तों पर निर्भर करेगा।
India-US Trade Deal में किन मुद्दों पर बातचीत जारी है?
समझौते से जुड़े प्रमुख मुद्दों में टैरिफ, बाजार तक पहुंच, ऊर्जा सहयोग और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध शामिल हैं। रूस से तेल खरीद जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई है।
