जम्मू-कश्मीर पुलिस ने भारतीय सेना के एक वरिष्ठ सेना अधिकारी की पत्नी के खिलाफ चीन से जुड़े विदेशी खुफिया एजेंटों को संवेदनशील जानकारी जुटाने और साझा करने में कथित भूमिका को लेकर मामला दर्ज किया है। तेलंगाना की रहने वाली सेना अधिकारी की पत्नी फिलहाल जम्मू में रह रही है। उसके खिलाफ Official Secrets Act, 1923 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।
हालांकि, 18 अक्टूबर 2026 तक सेना अधिकारी की पत्नी को गिरफ्तार नहीं किया गया था और शुरुआती जांच में यह स्थापित नहीं हुआ कि उसने कोई संवेदनशील जानकारी साझा की थी। मामले की जांच जारी है।
16 अक्टूबर को दर्ज हुई FIR
पुलिस ने 16 अक्टूबर 2026 को जम्मू के गांधी नगर पुलिस स्टेशन में FIR नंबर 290/2026 दर्ज की। इसमें Official Secrets Act की धारा 3 और 5 के साथ भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 और 61(2) लगाई गई हैं।
Official Secrets Act की धारा 3 राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रतिकूल जानकारी जुटाने या संप्रेषित करने से जुड़े अपराधों से संबंधित है। वहीं, धारा 5 संरक्षित जानकारी को गलत तरीके से साझा करने, अपने पास रखने या उसके प्रबंधन से जुड़े मामलों को कवर करती है।
FIR दर्ज होने के बाद महिला से पुलिस उपाधीक्षक (DSP) रैंक के अधिकारी ने पूछताछ भी की।
अकादमिक पहचान के जरिए संपर्क करने का आरोप
खुफिया एजेंसियों की शुरुआती जांच के अनुसार, चीन से जुड़े कुछ लोगों ने खुद को अकादमिक जगत से जुड़ा बताकर सेना अधिकारी की पत्नी से संपर्क किया था। आरोप है कि उन्होंने रणनीतिक और सैन्य संचालन से जुड़े विषयों पर लेख और लिखित सामग्री तैयार करने के लिए उसे काम दिया।
बताया गया है कि बातचीत की शुरुआत पर्यावरण और भू-राजनीति जैसे विषयों से हुई, लेकिन बाद में चर्चा रक्षा से जुड़े मामलों तक पहुंच गई। जांच से जुड़े सूत्रों ने इस तरीके को कथित तौर पर एक “Intellectual Trap
जांच के अनुसार, सेना अधिकारी की पत्नी कथित तौर पर इन लोगों के संपर्क में थी, लेकिन उसे उनकी वास्तविक पहचान और खुफिया एजेंट होने की जानकारी नहीं थी। हालांकि, ये शुरुआती जांच में सामने आए आरोप हैं और इनकी पुष्टि होना बाकी है।” यानी बौद्धिक जाल बताया है।
संवेदनशील दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक डेटा की जांच
सूत्रों के अनुसार, मामले की जांच तब तेज हुई जब संवेदनशील दस्तावेजों, तस्वीरों और इलेक्ट्रॉनिक डेटा को कथित तौर पर गुप्त तरीके से जुटाने, अपने पास रखने और भेजने से जुड़े इनपुट मिले। बताया गया है कि इस जानकारी का संबंध राज्य की सुरक्षा से हो सकता है और इसे एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन चैनलों के जरिए साझा किए जाने की आशंका की जांच की जा रही है।
हालांकि, पुलिस ने अब तक कथित दस्तावेजों की सटीक प्रकृति, विदेशी संपर्कों की पहचान या किसी जानकारी के हस्तांतरण की वास्तविक सीमा के बारे में सार्वजनिक रूप से विस्तृत जानकारी नहीं दी है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि FIR किन परिस्थितियों में दर्ज हुई और महिला की रिसर्च से जुड़ी गतिविधियों की प्रकृति क्या थी।

अभी तक जानकारी साझा करने की पुष्टि नहीं
18 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध रिपोर्टों में आधिकारिक सूत्रों और PTI के हवाले से बताया गया कि महिला को गिरफ्तार नहीं किया गया है। शुरुआती जांच में भी यह स्थापित नहीं हुआ कि उसने कोई संवेदनशील जानकारी साझा की थी।
फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर रही हैं और विदेशी खुफिया नेटवर्क से संभावित संपर्कों का पता लगाने में जुटी हैं। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।
विदेशी खुफिया एजेंसियों के काम करने के तरीके पर भी नजर
इस मामले में जांच एजेंसियां उस कथित तरीके की भी पड़ताल कर रही हैं, जिसमें विदेशी खुफिया नेटवर्क से जुड़े लोग अकादमिक या रिसर्च के नाम पर व्यक्तियों से संपर्क करते हैं और धीरे-धीरे रणनीतिक महत्व की जानकारी हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर पुलिस इस मामले की जांच खुफिया एजेंसियों के समन्वय से कर रही है। फिलहाल जांच जारी है और संवेदनशील जानकारी साझा किए जाने के आरोप की पुष्टि नहीं हुई है।
निष्कर्ष
सेना के वरिष्ठ सेना अधिकारी की पत्नी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, लेकिन अब तक न तो उनकी गिरफ्तारी हुई है और न ही शुरुआती जांच में संवेदनशील जानकारी साझा करने की पुष्टि हुई है। मामले में आगे की स्थिति जांच पूरी होने और आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद स्पष्ट होगी।
