Madhya Pradesh में ‘मामा vs चाचा’ की चर्चा तेज, शिवराज सिंह चौहान के दखल से CM मोहन यादव पर बढ़ा दबाव

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Madhya Pradesh में ‘मामा vs चाचा’ की चर्चा तेज, शिवराज सिंह चौहान के दखल से CM मोहन यादव पर बढ़ा दबाव

Madhya Pradesh के सीहोर जिले में आदिवासी परिवारों के घरों पर बुलडोजर चलाए जाने का मामला अब भोपाल तक पहुंच रहा है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के सार्वजनिक रूप से अधिकारियों पर सवाल उठाने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार पर दबाव बढ़ गया है। बीजेपी के भीतर इस मामले को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है।

5 दिन के धरने के बाद भोपाल की ओर कूच

सीहोर जिले के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के घर तोड़े जाने के विरोध में पांच दिनों तक धरना दिया गया, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। इसके बाद गुरुवार को आदिवासी समुदाय के लोगों ने भोपाल की ओर मार्च शुरू कर दिया। कोसमी गांव बुधनी विधानसभा क्षेत्र में आता है, जिसका प्रतिनिधित्व शिवराज सिंह चौहान कई वर्षों तक कर चुके हैं।

प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात करना चाहते हैं। उनकी मांग है कि जमीन से जुड़े दस्तावेजों पर विचार किया जाए, प्रभावित परिवारों को मुआवजा और पुनर्वास मिले तथा घरों को तोड़ने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो।

आयोजकों का अनुमान है कि इस मार्च में करीब 5,000 लोग शामिल हो सकते हैं। रास्ते में दूसरे गांवों के लोगों के जुड़ने से यह संख्या बढ़कर 10,000 तक पहुंचने की संभावना जताई गई है।

17 अक्टूबर को भोपाल में प्रदर्शन की योजना है। इस आंदोलन में 35 से अधिक गांवों के महिला, पुरुष, युवा, बच्चे और बुजुर्ग शामिल हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि स्थानीय प्रशासन से बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला, इसलिए वे अपनी बात सीधे मुख्यमंत्री के सामने रखना चाहते हैं।

मार्च में शामिल आदिवासी नेता रमेश बरेला ने कहा कि वन विभाग ने आदिवासी परिवारों के साथ अन्याय किया है। उनके मुताबिक, 11 अक्टूबर को 12 परिवारों के घर तोड़ दिए गए, जिससे वे बेघर हो गए। बरेला ने उम्मीद जताई कि जिस सरकार को लोगों ने चुना है, उसके मुख्यमंत्री उनकी शिकायत सुनकर न्याय सुनिश्चित करेंगे।

वन विभाग ने क्या दी सफाई?

वन विभाग और Madhya Pradesh वन विकास निगम का कहना है कि यह कार्रवाई वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए की गई। विभाग के अनुसार, संबंधित जमीन पर वर्ष 2021 में पौधारोपण किया गया था।

वहीं, प्रभावित परिवारों का दावा है कि वे पीढ़ियों से इस जमीन पर रह रहे हैं और खेती करते आए हैं। वे अपने घरों, फसलों और सामान के नुकसान के लिए मुआवजा, जमीन पर अपने दावों की मान्यता और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

मार्च शुरू होने से पहले ही शिवराज सिंह चौहान ने अपनी ही पार्टी की राज्य सरकार के अधिकारियों को सार्वजनिक रूप से फटकार लगाई थी। उन्होंने अधिकारियों पर अन्याय करने का आरोप लगाते हुए सवाल किया था कि बीजेपी को वोट देने वाले परिवारों को निशाना क्यों बनाया जा रहा है।

शिवराज सिंह के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान ने भी 13 अक्टूबर को कोसमी पहुंचकर प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और उनके साथ बैठकर भोजन किया। उनके इस दौरे से आंदोलन को लगातार राजनीतिक और सार्वजनिक ध्यान मिलता रहा।

मोहन यादव के सामने दोहरी चुनौती

इस मामले ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ प्रभावित आदिवासी परिवारों की मांगों पर कार्रवाई करनी है, तो दूसरी तरफ अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवराज सिंह चौहान की सार्वजनिक आलोचना का जवाब भी देना है। चौहान करीब दो दशकों तक तीन कार्यकालों में Madhya Pradesh के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

हालांकि, शिवराज सिंह चौहान ने सीधे तौर पर यह आरोप नहीं लगाया कि घर तोड़ने का आदेश मुख्यमंत्री ने दिया था। उनका आरोप है कि अधिकारियों ने ऐसा काम किया, जिससे मुख्यमंत्री की छवि खराब हो सकती है।

लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की उनकी मांग ने राज्य सरकार के लिए इस मामले को संवेदनशील बना दिया है। अब सरकार की प्रतिक्रिया को प्रभावित परिवारों की शिकायतों और पार्टी के एक वरिष्ठ नेता की आपत्तियों से निपटने के तौर पर भी देखा जा रहा है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि उन्होंने प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है और मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। शिवराज सिंह की आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता ने एक मुद्दा उठाया है और इसकी जांच कराई जाएगी। उनके मुताबिक, जांच के बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

गुरुवार देर रात शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के आवास पर उनसे मुलाकात की। इसमें आदिवासी समुदाय के सदस्य भी शामिल थे। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी को न्याय मिलेगा और आपसी बातचीत के जरिए व्यावहारिक समाधान निकाला जाएगा।

Madhya Pradesh

बीजेपी के अंदरूनी मतभेद भी आए सामने

कोसमी का मामला अब केवल आदिवासी परिवारों के विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं रह गया है। बीजेपी के कुछ पदाधिकारियों के मुताबिक, इस घटनाक्रम ने पार्टी के विधायकों और समर्थकों के एक वर्ग में मौजूद असंतोष को भी उजागर किया है।

पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि शिवराज सिंह चौहान से जुड़े नेताओं को मौजूदा सरकार में पहले की तुलना में कम महत्व मिल रहा है। खासकर अपने विधानसभा क्षेत्रों में प्रशासनिक काम करवाने को लेकर उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि यह असंतोष कुछ समय से बना हुआ था। उनके मुताबिक, मोहन यादव सरकार द्वारा शिवराज सिंह चौहान के कई फैसलों को बदले जाने से केंद्रीय मंत्री के समर्थकों में नाराजगी बढ़ी है।

कुछ मौजूदा और पूर्व मंत्रियों के साथ वरिष्ठ विधायकों की शिकायत है कि स्थानीय अधिकारी अब उनके अनुरोधों पर पहले जैसी तत्परता से कार्रवाई नहीं करते। वहीं, कुछ पूर्व मंत्रियों और नेताओं को लगता है कि उन्हें सरकारी कार्यक्रमों और सार्वजनिक आयोजनों में पहले जैसा सम्मान नहीं मिलता या उन्हें ऐसे आयोजनों से दूर रखा जा रहा है।

हालांकि, बीजेपी प्रवक्ता हितेश बाजपेयी ने पार्टी में किसी भी तरह के विवाद से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर कोई मतभेद नहीं है।

इससे पहले भी सरकार के फैसलों पर उठा चुके हैं सवाल

कोसमी का मामला ऐसा पहला मौका नहीं है, जब शिवराज सिंह चौहान ने Madhya Pradesh सरकार के कामकाज पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए हों।

जुलाई में उन्होंने मूंग की सरकारी खरीद में देरी को लेकर राज्य सरकार के रुख पर सवाल किया था। उस समय किसानों ने खरीद प्रक्रिया में देरी की शिकायत की थी।

इससे पहले जून 2025 में उन्होंने खिवनी वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र में आदिवासी निवासियों के खिलाफ हुई कार्रवाई के मामले में हस्तक्षेप किया था। इसके बाद सीहोर के संभागीय वन अधिकारी का तबादला कर दिया गया था।

कुल मिलाकर, कोसमी में आदिवासी परिवारों के घर तोड़े जाने से शुरू हुआ विवाद अब प्रशासनिक कार्रवाई, आदिवासी अधिकारों और बीजेपी के भीतर नेतृत्व से जुड़े सवालों तक पहुंच गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जांच और समाधान का भरोसा दिया है, जबकि प्रदर्शनकारी मुआवजे, पुनर्वास और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग पर कायम हैं।

इस मामले से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट पढ़ने के लिए The Indian Express की पूरी खबर देखें।

  1. Madhya Pradesh में शिवराज सिंह चौहान और मोहन यादव के बीच विवाद क्यों चर्चा में है?

    Madhya Pradesh में सीहोर जिले के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के घर तोड़े जाने के मामले पर शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। इससे राज्य सरकार पर कार्रवाई करने का दबाव बढ़ा है।

  2. Madhya Pradesh के सीहोर जिले में आदिवासी परिवारों के घर क्यों तोड़े गए?

    वन विभाग और Madhya Pradesh वन विकास निगम के अनुसार, वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए कार्रवाई की गई थी। प्रभावित परिवारों का कहना है कि वे पीढ़ियों से इस जमीन पर रहते और खेती करते आए हैं।

  3. शिवराज सिंह चौहान ने Madhya Pradesh सरकार से क्या मांग की है?

    शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से मुख्यमंत्री की छवि खराब हो सकती है।

  4. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मामले पर क्या कहा?

    Madhya Pradesh के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मामले की जांच कराई जा रही है। उन्होंने प्रभावित लोगों को न्याय दिलाने और बातचीत के जरिए व्यावहारिक समाधान निकालने का भरोसा दिया है।

  5. आदिवासी परिवारों की मुख्य मांगें क्या हैं?

    प्रदर्शनकारी परिवार मुआवजा, पुनर्वास, जमीन पर अपने दावों की मान्यता और घरों को तोड़ने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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Refex Industries को मिला ₹32.44 करोड़ का बड़ा कॉन्ट्रैक्ट, सरकारी कंपनी से मिला राख के ट्रांसपोर्टेशन का काम

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Refex Industries Limited ने 17 अक्टूबर 2026 को स्टॉक एक्सचेंज को सूचित किया कि कंपनी को मिनिस्ट्री ऑफ पावर के अंतर्गत आने वाली एक महारत्न सरकारी कंपनी से राख के परिवहन के लिए रेट कॉन्ट्रैक्ट मिला है। यह कॉन्ट्रैक्ट मिनिस्ट्री ऑफ पावर के अंतर्गत आने वाली एक महारत्न कंपनी से प्राप्त हुआ है, जिसकी अधिकतम कुल वैल्यू GST सहित ₹32.44 करोड़ है।

राख के परिवहन के लिए मिला कॉन्ट्रैक्ट

Refex Industries के अनुसार, इस कॉन्ट्रैक्ट में राख की खुदाई, लोडिंग, परिवहन और डाइक (Dykes) से अनलोडिंग जैसी सेवाएं शामिल हैं। यह काम सरकारी क्षेत्र की एक महारत्न कंपनी के लिए किया जाएगा। कंपनी ने बताया कि यह रेट कॉन्ट्रैक्ट एक साल के लिए वैध रहेगा। जरूरत पड़ने पर इसकी अवधि को अतिरिक्त छह महीने तक बढ़ाया जा सकता है।

Refex Industries

ऑर्डर से जुड़ी अहम जानकारी

ParticularsDetails
CompanyRefex Industries Limited
Order Awarding EntityMaharatna PSU under the Ministry of Power
Maximum Contract Value₹32,44,50,000 (Including GST)
Contract Duration1 Year
Extension PeriodUp to an Additional 6 Months
Scope of WorkAsh Excavation, Loading, Transportation, and Unloading
Order TypeDomestic
Promoter Group InterestNo
Related Party TransactionNo

सरकारी कंपनी के साथ घरेलू कॉन्ट्रैक्ट

कंपनी की एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक, यह कॉन्ट्रैक्ट घरेलू श्रेणी में आता है। इसमें प्रमोटर या प्रमोटर ग्रुप का कोई हित नहीं है। साथ ही, कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह सौदा रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन के अंतर्गत नहीं आता।

Refex Industries ने यह जानकारी SEBI के लिस्टिंग ऑब्लिगेशन एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स (LODR) रेगुलेशन, 2015 के रेगुलेशन 30 के तहत साझा की है।

निष्कर्ष

Refex Industries को मिला यह कॉन्ट्रैक्ट राख के परिवहन और उससे जुड़ी सेवाओं के लिए है। इसकी अधिकतम वैल्यू GST सहित ₹32.44 करोड़ है और शुरुआती अवधि एक साल रखी गई है, जिसे छह महीने तक बढ़ाया जा सकता है।

Source :- https://www.bseindia.com/xml-data/corpfiling/AttachLive/d7776ca9-3a48-4cc4-bf48-fb8ab40c6dc1.pdf

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