ओडेसा में रूस का कहर जारी: मिसाइल हमले में 8 की मौत, 27 घायल

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यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, शुक्रवार रात रूस के हमले में यूक्रेन के ओडेसा क्षेत्र में आठ लोगों की मौत हो गई और 27 लोग घायल हो गए। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब रूस लगातार ब्लैक सी के अहम बंदरगाह शहर ओडेसा को निशाना बना रहा है।

यूक्रेन की स्टेट इमरजेंसी सर्विस के अनुसार, ये मौतें पिवदेन्ने कस्बे में स्थित एक पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर फैसिलिटी पर रूसी मिसाइल हमले के कारण हुईं।

अधिकारियों ने बताया कि हमले के वक्त कुछ पीड़ित एक बस में सवार थे, जो गोलाबारी की चपेट में आ गई।

पिछले नौ दिनों से रूस लगातार ओडेसा पर हमले कर रहा है। इसके चलते शहर और आसपास के इलाकों में करीब एक हफ्ते तक बिजली गुल रही, जबकि बंदरगाह ढांचे और आम नागरिकों के जहाजों को भी नुकसान पहुंचा है।

सर्दियां शुरू होते ही रूस ने यूक्रेन की ऊर्जा व्यवस्था को कमजोर करने पर खास ध्यान दिया है। हाल के महीनों में उसने एक साथ सैकड़ों ड्रोन और मिसाइल दागकर ज्यादा लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता हासिल की है।

इस बीच, ओडेसा क्षेत्र के सैन्य प्रशासन प्रमुख ओलेह किपेर के मुताबिक, इलाके के उत्तर और दक्षिण हिस्सों को जोड़ने वाले दो अहम पुलों पर भी हमले हुए हैं। इन पुलों की मरम्मत का काम फिलहाल जारी है।

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ग्रीनलैंड में तेल और खनिजों की खोज पर ट्रंप का बड़ा दावा, डेनमार्क ने साफ किया- नियम नहीं बदलेंगे

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ग्रीनलैंड में तेल और खनिजों की खोज पर ट्रंप का बड़ा दावा, डेनमार्क ने साफ किया- नियम नहीं बदलेंगे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड में बड़े पैमाने पर तेल, गैस और खनिजों की खोज शुरू होने का दावा किया है। हालांकि, डेनमार्क ने इस पर स्पष्ट किया है कि अमेरिका को ग्रीनलैंड के प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के लिए कोई विशेष अधिकार नहीं दिए गए हैं। डेनमार्क के मुताबिक, हाल ही में हुए समझौते से खनन और ड्रिलिंग से जुड़े मौजूदा नियमों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

डेनमार्क ने अमेरिका को क्या संदेश दिया?

डेनमार्क के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को दोहराया कि पिछले महीने डेनमार्क, ग्रीनलैंड और अमेरिका के बीच हुए समझौते में प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के नियमों को नहीं बदला गया है।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड के प्राकृतिक संसाधनों तक पहुंच के मामले में अमेरिकी निवेशकों को नाटो और यूरोपीय संघ के अन्य सदस्य देशों के निवेशकों के मुकाबले कोई विशेष तरजीह नहीं दी जाएगी।

इस बीच, ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ग्रीनलैंड को अमेरिका का नया और खूबसूरत ग्रीनलैंड बताते हुए दावा किया कि वहां बड़े पैमाने पर तेल, गैस और खनिजों की खोज की तैयारियां शुरू होने वाली हैं। हालांकि, उन्होंने इस बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी।

अमेरिका और ग्रीनलैंड के बीच समझौते में क्या है?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन और ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन ने 22 सितंबर को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान 10 पन्नों के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

यह समझौता ऐसे समय हुआ, जब ट्रंप की ग्रीनलैंड पर नियंत्रण स्थापित करने की धमकियों के कारण कई महीनों से तनाव बना हुआ था।

समझौते के तहत अमेरिका को उत्तर-पश्चिमी ग्रीनलैंड में स्थित अपने दूरस्थ सैन्य ठिकाने पिटुफिक स्पेस बेस की गतिविधियों को आधुनिक बनाने और उनका विस्तार करने की अनुमति दी गई है।

इसके अलावा, इस समझौते से दो नए सैन्य ठिकानों और ट्रंप की प्रस्तावित ‘गोल्डन डोम’ मिसाइल रक्षा प्रणाली का रास्ता भी खुला। साथ ही, इसमें डेनमार्क की संप्रभुता और ग्रीनलैंड के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार की दोबारा पुष्टि की गई।

हालांकि, समझौते में खनन या तेल-गैस की ड्रिलिंग के लिए अमेरिका को कोई अधिकार नहीं दिया गया है।

ग्रीनलैंड में तेल और खनिजों की खोज पर ट्रंप का दावा

ग्रीनलैंड में तेल की खोज पर पहले से प्रतिबंध

ग्रीनलैंड ने 2021 में यूरेनियम खनन और भविष्य में तेल की खोज पर प्रतिबंध लगा दिया था। फिलहाल, वहां की सरकार इस बात की समीक्षा कर रही है कि टेक्सास की कंपनी ग्रीनलैंड एनर्जी को प्रतिबंध से पहले जारी किए गए परमिट के आधार पर काम करने की अनुमति दी जा सकती है या नहीं।

कंपनी ने अगस्त में कहा था कि वह 2027 में ग्रीनलैंड के पूर्वी तट पर स्थित एक ऐसे बेसिन में तेल की ड्रिलिंग करने की योजना बना रही है, जहां पहले परीक्षण नहीं किया गया है। हालांकि, कंपनी के पास अपना ड्रिलिंग परमिट नहीं था।

ग्रीनलैंड में तेल को लेकर ट्रंप की रणनीति पर क्यों उठे सवाल?

डेनमार्क की सुरक्षा नीति के सलाहकार जैकब कार्सबो का मानना है कि ट्रंप का हालिया बयान संकेत देता है कि ग्रीनलैंड पर नियंत्रण हासिल करने की उनकी इच्छा अब भी बरकरार हो सकती है।

उन्होंने चेतावनी दी कि ट्रंप प्रशासन और डेनमार्क के बीच हुए समझौते से यह निष्कर्ष निकालना गलत और बेहद जोखिम भरा होगा कि ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की मंशा बदल गई है।

वहीं, डेनिश इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल स्टडीज के वरिष्ठ शोधकर्ता मिकेल ओलेसन ने अल जजीरा से बातचीत में कहा कि खनन और खोज के अधिकारों से जुड़े कई पहलुओं पर अभी स्पष्टता नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्य रूप से अमेरिकी पक्ष से आ रही जानकारी को पूरी तरह सही मानने के बजाय सावधानी से देखना चाहिए।

रोम स्थित नाटो डिफेंस कॉलेज के फेलो रिचर्ड वेट्ज ने कहा कि ट्रंप पीछे हटे और उन्हें अपनी शुरुआती मांगों से कम पर समझौता करना पड़ा। हालांकि, उनके मुताबिक, औपचारिक रूप से ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने की मांग को छोड़कर ट्रंप को काफी हद तक वह सब मिल गया, जो वे चाहते थे।

आगे क्या होगा?

ग्रीनलैंड में प्राकृतिक संसाधनों की खोज को लेकर ट्रंप के दावे और डेनमार्क के स्पष्टीकरण के बीच अंतर साफ दिखाई देता है। फिलहाल, सितंबर में हुए समझौते से अमेरिका को सैन्य गतिविधियों के विस्तार का रास्ता मिला है, लेकिन खनन और ड्रिलिंग के अधिकार नहीं मिले हैं। ऐसे में ग्रीनलैंड के मौजूदा कानूनों और परमिट से जुड़े नियम इस मामले में अहम बने रहेंगे।

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ग्रीनलैंड में तेल की खोज से जुड़े 5 महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

1. ग्रीनलैंड में तेल की खोज को लेकर ट्रंप ने क्या दावा किया?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ग्रीनलैंड में तेल, गैस और खनिजों की बड़े पैमाने पर खोज जल्द शुरू होने वाली है। हालांकि, उन्होंने इसकी विस्तृत जानकारी नहीं दी।

2. क्या अमेरिका को ग्रीनलैंड में तेल निकालने की अनुमति मिल गई है?

नहीं। डेनमार्क के अनुसार, अमेरिका और ग्रीनलैंड से जुड़े हालिया समझौते में तेल की ड्रिलिंग या खनन के अधिकार नहीं दिए गए हैं।

3. ग्रीनलैंड में तेल की खोज पर क्या प्रतिबंध है?

ग्रीनलैंड ने 2021 में भविष्य में तेल की खोज और यूरेनियम खनन पर प्रतिबंध लगा दिया था। वहां तेल की खोज के लिए मौजूदा नियम और परमिट महत्वपूर्ण हैं।

4. ग्रीनलैंड में तेल की ड्रिलिंग कब शुरू हो सकती है?

टेक्सास की कंपनी ग्रीनलैंड एनर्जी ने अगस्त में कहा था कि वह 2027 में ग्रीनलैंड के पूर्वी तट पर एक ऐसे बेसिन में तेल की ड्रिलिंग की योजना बना रही है, जहां पहले परीक्षण नहीं हुआ है। हालांकि, कंपनी के पास अपना परमिट नहीं था।

5. ग्रीनलैंड में तेल के मुद्दे पर डेनमार्क का क्या रुख है?

डेनमार्क का कहना है कि ग्रीनलैंड के प्राकृतिक संसाधनों तक पहुंच के मामले में अमेरिकी निवेशकों को दूसरे नाटो और यूरोपीय संघ के देशों के निवेशकों पर कोई विशेष प्राथमिकता नहीं दी जाएगी।

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